बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउडेंशन में वैक्सीन डिलीवरी के अंतरिम निदेशक वोलाइन मिथशल ने कहा, ‘पहले की अपेक्षा अब अधिक बच्चों की वैक्सीन तक पहुंच है।’ उन्होंने यह भी कहा, ‘हमें यूनिसेफ और सभी वैश्विक व दुनियाभर में कंट्री भागीदारों के साथ काम करने में प्रसन्नता है, जो सभी बच्चों को, खासतौर पर वो जो सबसे गरीब देशों के बच्चों को यह सुनिश्चित करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं कि जिंदगी के लिए खतरा बने संक्रामक रोगों से उन्हें बचाया जा सकता है।’
वैक्सीन के फायदों के बावजूद, 2017 में अनुमानतः 15 लाख बच्चे वैक्सीन से रोके जा सकने वाले रोगों से मर गए। जबकि ऐसा अक्सर वैक्सीन की कमी के कारण होता है, कुछ देशों में, कई परिवार वैक्सीन संबंधी संशय के कारण अपने बच्चों को टीके लगवाने में देरी कर देते हैं या इंकार कर रहे हैं।
इसके चलते कई महामारियों के प्रकोप फैले हैं। खसरा में उभार खतरनाक स्तर पर है, खासतौर पर उच्च आय वाले देशों में। डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों पर वैक्सीन के बारे में जानकारी का अभाव रहना इसका एक मुख्य कारण है।
इसी कारण से इस बार यूनिसेफ अभियान का केंद्रीय बिंदु 60 सैंकेड की एक एनीमिटिड फिल्म है- ‘डैंजर्स’। यह ऐसे बच्चों के बारे में है जो जाने अनजाने संक्रमण वाली बीमारियों के चंगुल में जा फंसते हैं। यह वीडियो अरबी, चीनी, फेंच, हिंदी, रूसी, स्पेनिश आदि भाषा में उपलब्ध है।
यह एनीमेशन वीडियो स्पष्ट बताता है कि अभिभावक अपने बच्चों को उन सभी खतरों से बचा नहीं सकते जिनमें बच्चे खुद को डाल लेते हैं। वे टीकाकरण का इस्तेमाल अपने बच्चों को उन खतरों से बचाने में मदद करने के लिए कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, यूनिसेफ के विशेषज्ञ सोशल मीडिया पर टीकाकरण से संबंधित सवालों के जवाब भी देंगे। इसमें वैक्सीन कैसे काम करता है, उनका परीक्षण कैसे होता है, बच्चों को वैक्सीन क्यों लेना चाहिए, और इसके साथ ही साथ समय पर बच्चों का टीकाकरण नहीं कराने के खतरें भी शमिल हैं।
अमिताभ बच्चन यूनिसेफ के सद्भावना दूत हैं और लंबे समय से टीकाकरण के पैरोकार हैं। उनका कहना है कि लाखों फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ता पैदल, पानी को पार करके, बर्फ के ऊपर, यहां तक कि घोड़ा गाड़ी के जरिए जीवन-संरक्षक वैक्सीन के वितरण के लिए बहुत दूर तक यात्रा करते हैं। यद्यपि वे यदा-कदा भय और शंका का सामना करते हैं, वे जानते हैं कि वे जिंदगिया बचा रहे हैं।
हम भी मिथकों का विरोध करने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं और हरेक को जानना चाहिए कि ‘#वैक्सीनवर्क’ सम्पूर्ण टीकाकरण कवरेज (एफआईसी) को गति देने के लिए और जिस तक पहुंच नहीं पाया है, उस तक पहुंचने के लिए, भारत सरकार ने मिशन इंद्रधनुष नामक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया था।
190 जिलों में कराया गया एक हालिया सर्वे बताता है कि मिशन इंद्रधनुष के बाद, संपूर्ण टीकाकरण कवरेज वाले बच्चों के अनुपात में मिशन इंद्रधनुष से पहले की तुलना में 18.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मिशन इंद्रधनुष से सीखे गए सबकों का इस्तेमाल देशभर में इस उद्देश्य के साथ कि देश में 90 प्रतिशत एफआईसी को हासिल करने व बनाए रखने के लिए देशभर में छूट गए बच्चों तक पहुंचने के लिए किया जा रहा है।
भारत ने पांच साल से कम आयु के बच्चों में निमोनिया और डायरिया संबधित मौतों व तकलीफों से बचाव व कम करने के लिए न्यूमोकोकल और रोटावायरस जैसे नए वैक्सीन शुरू कर मजबूत प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया है।
भारत में खसरा रूबेला अभियान
भारत ने फरवरी 2017 में एमआर वैक्सीन एक अभियान के जरिए लांच की और यह 32 राज्यों/केंद्र शसित क्षेत्रों में 305 मिलियन बच्चों को लगाया जा चुका है। एमआर वैक्सीन अपनी गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए डब्लयूएचओ का प्री-क्वालिफाइड वैक्सीन है और सैंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन के द्वारा लाइसेंस मिला हुआ है।
अभियान में इस्तेमाल होने वाला एमआर वैक्सीन भारत में बनता है और विश्वभर में इस्तेमाल के लिए निर्यात किया जाता है। यूनिसेफ टीकाकरण कार्यक्रम का एक तकनीकी भागीदार है और सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्व है कि कोई भी बच्चा उन रोगों के कष्टों से नहीं गुजरेगा, जिन रोगों को टीकाकरण से रोका जा सकता है।