- अचानक कोई बहुत अधिक सोने लगे या नींद न आए
- खुद की देखभाल के प्रति गंभीरता अचानक कम होना
- समाज से अलग-थलग रहना
- हमेशा नकारात्मक भाव रखना या गलत विचार आना
मस्तिष्क का नियंत्रण से बाहर जाना
- स्कूल, दफ्तर या अन्य जगहों से दूर होने लगना, क्षमता प्रभावित होने लगना
- सोचने की क्षमता कमजोर होना, बात को समझा न पाना
- संवेदनशीलता बढ़ना, आवाज, गंध और स्पर्श से परेशानी
- किसी से घबराने लगना, व्यवहार और स्वभाव में अजीब बदलाव
महामारी के इस दौर में अपने मित्रों व परिचितों से भावनात्मक दूरी न बनाएं। अपने जानने वाले हर व्यक्ति के साथ फोन, मैसेज, व्हाट्सएप या किसी भी रूप से संपर्क में रहें। उनसे बस दो शब्द में पूछें ‘आप कैसे हैं’ ठीक हैं। इससे सामने वाले को कभी अकेलापन महसूस नहीं होता है।
युवाओं को अधिक सतर्क रहने की जरूरत
- अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली के मनोरोग विभाग के प्रो. राजेश सागर बताते हैं कि कोरोना ने लोगों को अलग-थलग करने के साथ हर स्तर पर कमजोर किया है। बच्चा हो या बड़ा, हर कोई इससे प्रभावित हुआ है। युवाओं को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि इनमें बीमार मन के लक्षण आमतौर पर घबराहट, खराब मूड, एकाग्रता में कमी और स्वभाव में बदलाव है।
- मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल की मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. अपर्णा कृष्णन बताती हैं कि घर परिवार के लोग इन लक्षणों को नजरअंदाज नही करें। बिना देरी के तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।
दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के साइकोलॉजिस्ट डॉ. इमरान नूरानी बताते हैं कि आधुनिकता मानसिक सेहत पर भारी पड़ रही है। मन अमीर बनने, गैजेट्स, गाडि़यां और अन्य ऑनलाइन एप और गेम्स में उलझा हुआ है। आकांक्षाएं बढ़ने से मन की तरंगें प्रभावित हो रहीं है।
बीमार मन और नशा मौत का कॉकटेल
- डॉ. मिश्रा बताते हैं, बीमार मन और नशा मौत का कॉकेटल साबित होता है। शराब या अन्य नशीले पदार्थों से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। मस्तिष्क की नसें फट जाती हैं।
- डॉ. सागर के अनुसार, लोग इस दौरान नशे की ओर आकर्षित होते हैं। इससे व्यक्ति अच्छा महसूस तो करता है, लेकिन बीमारी गंभीर होती चली जाती है।
मानसिक रोग का इलाज भी चुनौती...
डब्ल्यूएचओ के अनुसार देश में प्रति एक लाख की आबादी पर 0.3 मनोचिकित्सक, 0.3 नर्स, 0.07 मनोवैज्ञानिक और 0.07 सामाजिक कार्यकर्ता हैं। जबकि प्रति एक लाख पर तीन मनोचिकित्सक, तीन नर्स, तीन मनोवैज्ञानिक और तीन सामाजिक कार्यकर्ता का होना जरूरी है।
मानसिक विकार संबंधी किसी तरह की तकलीफ होने पर रोगी या उसके परिवार को इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाने में कोई शर्म या झिझक नहीं होनी चाहिए। बीमार मन एक व्यक्ति नहीं पूरे परिवार के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। - प्रो. राजेश सागर, मनोरोग विभाग, एम्स, नई दिल्ली
यहां पर सरल इलाज
- इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड एलाइड साइंसेज, दिल्ली
- विद्यासागर इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, दिल्ली
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज, बेंगलूरू
- सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइक्रेटरी, कांके, रांची
- इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड हॉस्पिटल, आगरा
- एम्स, नई दिल्ली