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हाजी अली दरगाह में महिलाओं की एंट्री, 80 ने चादर चढ़ाई

Wed, 30 Nov 2016 04:10 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : ANI
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महिला और पुरुष में धार्मिक असमानता के खिलाफ जंग में मंगलवार को उस समय ऐतिहासिक मोड़ आया जब लंबी कानूनी लड़ाई के बाद महिलाओं ने मुंबई के  हाजी अली दरगाह में प्रवेश किया और मजार पर चादर चढ़ाई। भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन की सह संस्थापक नूरजहां एस. नियाज सहित देशभर की 80 महिलाएं दरगाह की मजार तक गईं और इबादत की।
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नूरजहां ने कहा कि उन्हें बिना रोकटोक दरगाह के भीतर जाने दिया गया। ट्रस्टियों ने भी पूरा सहयोग किया। उन्होंने बताया कि प्रतिबंध के खिलाफ कानूनी लड़ाई में हिस्सा लेने वाली सभी महिलाएं मजार तक गईं। हालांकि मजार को छूने की इजाजत नहीं दी गई, लेकिन महिलाओं को चादर चढ़ाने दिया गया। नूरजहां ने बताया कि वह आगे भी यहां आती रहेंगी। 

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर को हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी हटा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर दरगाह के मुख्य हिस्से तक पुरुषों को जाने की इजाजत है तो महिलाओं को क्यों नहीं? मामले की सुनवाई के दौरान दरगाह की ओर से ट्रस्ट ने कोर्ट को बताया गया था कि बांबे हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा।
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बता दें कि जून 2012 तक महिलाओं को मुस्लिम संत सैयद पीर हाजी अली शाह बुखारी की मजार के गर्भगृह तक जाने की अनुमति थी, लेकिन उसके बाद महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। साल 2014 में भारतीय मुस्लिम महिला आंदोलन ने इस प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी। इसी साल अगस्त में बांबे हाईकोर्ट ने महिलाओं को मजार तक जाने पर लगे प्रतिबंध को हटाने का आदेश दिया था। 

हाईकोर्ट ने कहा था कि महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध मूलभूत अधिकारों का उल्लंघन है। उसके पश्चात हाजी अली दरगाह ट्रस्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। कानूनी लड़ाई में हारने के बाद दरगाह ट्रस्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए चार सप्ताह की मोहलत मांगी थी।
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दो मीटर दूर से इबादत की इजाजत

फाइल फोटोः मुंबई में स्थित हाजी अली दरगाह - फोटो : PTI
हाजी अली दरगाह के ट्रस्टी सुहैल खांडवानी ने कहा है कि महिलाओं को प्रवेश देने के साथ ही एक नया नियम भी तैयार किया गया है। ट्रस्ट के नए नियम के अनुसार अब किसी को भी मजार को छूने की इजाजत नहीं होगी। महिला हों या पुरुष सभी को मजार से दो मीटर दूर से ही इबादत करनी होगी। वहीं, नई व्यवस्था के तहत ट्रस्ट ने दरगाह में प्रवेश करने वाली महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग कतार लगेगी।

यह महिलाओं की बड़ी जीत : भूमाता ब्रिग्रेड  
शनि शिंगणापुर मंदिर, त्र्यंबकेश्वर के शिवमंदिर, कोल्हापुर के महालक्ष्मी मंदिर और हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश के लिए अभियान चलाने वाली भूमाता ब्रिगेड की अध्यक्ष तृप्ति देसाई ने इसे बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान पूर्वक अंदर जाने दिया गया है और यह हमारे आंदोलन की जीत है।

महिलाएं भी समान अधिकार की हकदार : फडणवीस
हाजी अली दरगाह में महिलाओं के प्रवेश पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महिलाएं भी समान अधिकार की हकदार हैं। सभी को समान अधिकार मिलना चाहिए। सरकार की हमेशा से महिला-पुरुष में समानता की नीति रही है, लेकिन धर्म के मामले में सरकार के हस्तक्षेप की मर्यादा है।
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