केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि, बाल संरक्षण बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। बाल संरक्षण के लिए बजट आवंटन 2009-10 में लगभग 60 करोड़ रुपये था। उसे 2024-25 में बढ़ाकर लगभग 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों के शिकार हो रहे कम उम्र के युवाओं को लेकर चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि, नाबालिग लगातार साइबर क्राइम के शिकार हो रहे हैं। बाल संरक्षण पर नौवें राष्ट्रीय वार्षिक हितधारक परामर्श में केंद्रीय मंत्री ने बाल संरक्षण, विशेषकर देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों (सीएनसीपी) और कानून से संघर्षरत बच्चों (सीआईसीएल) के प्रति सरकार की बढ़ती प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला।
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साइबर बुलिंग के शिकार हो रहे है नाबालिग
उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण बजट में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की गई है। बाल संरक्षण के लिए बजट आवंटन 2009-10 में लगभग 60 करोड़ रुपये था। उसे 2024-25 में बढ़ाकर लगभग 1,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है। दिव्यांग बच्चों के सामने आ रही समस्याओं पर बात करते हुए मंत्री ने कहा कि ये बच्चे अक्सर सामाजिक अपराध करने वालों के लिए आसान निशाना बन जाते हैं। उन्होंने साइबर बुलिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों में नाबालिगों की संलिप्तता जैसे मुद्दों के समाधान पर बल दिया।
उन्होंने कहा, बच्चे, विशेषकर विकलांग बच्चे, सबसे अधिक असुरक्षित होते हैं। समाज और सरकार के रूप में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि, बहुत से बच्चे इस बात से अनजान हैं कि वे घरेलू हिंसा, साइबर अपराध और बदमाशी जैसे अपराधों के शिकार हैं। उनकी सुरक्षा पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
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पॉक्सो को और मजबूत बनाने पर जोर
उन्होंने किशोर न्याय अधिनियम 2015 और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम को मजबूत करने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि, हमने मानव तस्करी की रोकथाम पर भी काम किया है। जब कानूनों का उल्लंघन होता है, तो न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने न्यायपालिका से बच्चों से संबंधित मुद्दों के प्रति संवेदनशील बने रहने का आग्रह किया। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित न्यायाधीशों की प्रशंसा की और न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने और जनता का विश्वास बनाने में उनके प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में सीजेआई भी हुए शामिल
वहीं इस कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने हिस्सा लिया। उन्होंने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पुलिस थानों से लेकर अदालतों तक न्याय प्रणाली दिव्यांग बच्चों की बढ़ती कमजोरियों को समझे और उन पर कार्रवाई करे। दिव्यांग व्यक्तियों के सामने आने वाली चुनौतियां भौतिक पहुंच के मुद्दों से कहीं अधिक हैं। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि पुलिस थानों से लेकर अदालतों तक की न्याय प्रणाली इन बच्चों की बढ़ती हुई कमजोरियों को समझे और उन पर कार्रवाई करे। पुनर्स्थापनात्मक न्याय दृष्टिकोण को शामिल करना ऐसा ही एक समाधान है।