कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह
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ऑपरेशन सिंदूर - सोफिया कुरैशी और व्योमिका सिंह
ऑपरेशन सिंदूर का नाम सुनते ही, आंखों में सेना का शौर्य और जवानों के बहादुरी की तस्वीरें एकाएक सामने आ जाती है। ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत तब हुई, जब 22 अप्रैल को पाकिस्तान से घुसे कुछ आतंकियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में छुट्टियां मना रहे भारतीय नागरिकों और पर्यटकों पर हमला बोला और 26 लोगों की निर्मम हत्या कर दी। इस बर्बर आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना को हर तरीके से कार्रवाई करने की छूट मिली। 15 दिन बाद 7 मई को सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया और पाकिस्तान और पीओके में छिपे आतंकियों और उनके अड्डों को नेस्तानाबूद किया।
एक तरफ सीमा पर देश के जवान दुश्मनों के सभी मंसूबों को नाकाम कर मुंहतोड़ जवाब दे रहे थे, दूसरी तरफ देश की बेटियों ने अंदर मोर्चा संभाला। देशवासियों को पाकिस्तान की करतूतों और भारतीय सेना के शौर्य से अवगत कराया। भारतीय सेना में कर्नल सोफिया कुरैशी और भारतीय वायु सेना में विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने न सिर्फ आतंक को पालने वाले पाकिस्तान की नापाक हरकतों से देश को रूबरू कराया, बल्कि उन्होंने ये भी देशवासियों को बताया कि पाकिस्तान झूठी और भ्रामक खबरों के जरिए हमारे मनोबल को तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहा है।
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2025 के मध्य यानी मई महीने में जहां ऑपरेशन सिंदूर में देश ने बोटियों की अप्रतिम क्षमता देखी। अब दूसरा मौका था साल के अंत का, जब क्रिकेट के मैदान पर करीब डेढ़ महीने तक चले बेटियों के कठिन यज्ञ की बारी थी।
विश्व चैंपियन बनी भारतीय महिला क्रिकेट टीम
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महिला क्रिकेट विश्व कप - भारत की बेटियां विश्व चैंपियन
भारत में 30 सितंबर को महिला क्रिकेट विश्व कप की शुरुआत हुई। देश की बेटियों ने जिस तरह की मेहनत क्रिकेट के मैदान पर की, उसे किसी यज्ञ से कम नहीं कहा जा सकता क्योंकि दुनिया के सामने 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करना और कभी जीत तो कभी हार का सामना करने के बाद फिर से तैयार होना आसान बिल्कुल नहीं है। महिला क्रिकेट टीम ने खूब मेहनत की और उसका फल मैदान व मुकाबलों में देखने को भी मिला, लेकिन फिर लगातार तीन मैच की हार ने देशवासियों को हतोत्साहित कर दिया, लेकिन जिनका हौसला बुलंद वो थीं देश की बेटियां, जो एक बार फिर विजय अभियान पर निकलीं...।
तीन हार के बाद भारत की बेटियों का सामना न्यूजीलैंड की मजबूत टीम से हुआ। यह मैच करो या मरो की स्थिति वाला था, जिसमें बेटियों ने हर क्षेत्र में शानदार प्रदर्शन किया। भारत के लिए प्रतिका रावल और स्मृति मंधाना ने शतकीय पारी खेली तो मध्यक्रम में जेमिमा रॉड्रिग्स ने शानदार 76 रन बनाए। गेंदबाजी में भी बेटियों ने न्यूजीलैंड के खिलाड़ियों पर पूरा दबदबा बनाए रखा। बारिश से बाधित इस मैच को भारत ने 53 रनों से जीता और सेमीफाइनल का टिकट पक्का किया।
सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला सात बार की विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलियाई टीम से था। इस मुकाबले के हर तरह से शानदार होने की उम्मीद भी थी और ऐसा हुआ भी। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए देश की बेटियों के सामने पहाड़ जैसा 338 रनों का लक्ष्य खड़ा किया। भारत की बेटियों ने भी खूब दमखम दिखाया। सांस रोक देने वाले मुकाबले में जेमिमा रॉड्रिग्स (127) और कप्तान हरमनप्रीत कौर (89) ने मोर्चा संभाला और भारत को जीत के मुहाने पर पहुंचाया। आखिरी में दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष और अमनजोत कौर की साहसिक पारियों की बदौलत भारत ने 338 रनों का विशाल लक्ष्य 48.3 ओवर यानी नौ गेंद शेष रहते हासिल किया और खिताब की ओर एक और कदम बढ़ाया।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के साथ स्क्वाड्रन लीडर शिवांगी सिंह।
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