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महिला थी काल्पनिक, फिर भी निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जीतती रही केस

Tue, 20 Mar 2018 01:09 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
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बेंगलुरू में करीब 30 सालों से एक जमीन विवाद चल रहा था। यह विवाद सेंट एनी एजुकेशन सोसाइटी और लक्ष्मी नामक महिला के बीच का था। इस केस की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाई कोर्ट तक चली। लेकिन सबसे अजीब बात तो ये थी कि महिला कभी कोर्ट के सामने नहीं आई, उसे किसी ने देखा भी नहीं फिर भी वह लगातार केस जीतती रही। यह केस लक्ष्मी की ओर से दायर किया गया था। जिसमें उसने कहा था कि बेंगलुरू के कौडेनाहल्ली की विवादित जमीन संरक्षित भूमी है इसलिए सरकार इसे सेंट एनी एजुकेशन सोसाइटी के नाम नहीं कर सकती। 

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लेकिन अब 30 साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेंट एनी एजुकेशन सोसाइटी के हक में फैसला दिया है। जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने लक्ष्मी के बारे में खुलासा करते हुए कहा है कि 1989 से लेकर 1997 तक लक्ष्मी की पैरवी उसके पावर ऑफ अटॉर्नी बी श्रीरामुलु ही करते रहे। लेकिन 1997 के बाद कोई नहीं आया। यह केस 1989 में पहली बार निचली अदालत में दर्ज किया गया था। उस समय लक्ष्मी की उम्र 67 साल थी। 

जस्टिस मदन बी लाकुर ने आगे कहा कि मामले को अब 30 साल हो चुके हैं। यानि लक्ष्मी की उम्र अब 97 वर्ष होनी चाहिए। ऐसे में यह कह नहीं सकते कि वो अब जिंदा भी होगी या नहीं। हमें तो लगता है ये महिला एक काल्पनिक किरदार है। आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने ही साल 2006 में इस केस पर फैसला सुनाया था। जिसमें फैसला लक्ष्मी के हक में दिया गया था। बाद में सोसाइटी ने केस की दोबारा सुनवाई शुरू करने के लिए अपील की। तब कहीं जाकर लक्ष्मी के अस्तित्व के बारे में खुलासा हो पाया। 
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हालांकि साल 2009 में भी कोर्ट की अवमानना के मामले में पुलिस ने लक्ष्मी की तलाश की थी पर वह कहीं नहीं मिली। इन्हीं सब बातों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से कहा कि वह लक्ष्मी के हक में दिए गए फैसले को रद्द करे। साथ ही इस केस को अब खत्म कर दिया जाए।  

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