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WMO: 2023 में हर महीने बना गर्मी का नया रिकॉर्ड, जनवरी से लेकर दिसंबर तक जलवायु परिवर्तन का दिखा असर

Tue, 26 Dec 2023 05:44 AM IST
यशोधन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

नवंबर माह में पहली बार वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। जनवरी से अक्तूबर तक का औसत तापमान औद्योगिक काल से पहले (1850 से 1900) समान अवधि के औसत तापमान की तुलना में 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अलनीनो और जलवायु परिवर्तन के चलते दुनियाभर में वर्ष 2023 रिकॉर्ड स्तर पर गर्म रहा। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) के अनुसार 2024 और भी अधिक गर्म होने की उम्मीद है। इस वर्ष मौसम की कुछ चरम घटनाओं ने भी नए रिकॉर्ड बनाए।

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नवंबर माह में पहली बार वैश्विक तापमान 2 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया। जनवरी से अक्तूबर तक का औसत तापमान औद्योगिक काल से पहले (1850 से 1900) समान अवधि के औसत तापमान की तुलना में 1.43 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। डब्ल्यूएमओ के अनुसार  2023 का अलनीनो बेहद प्रभावशाली है। इसका असर लगातार भारत पर दिख रहा है।

आशंका है कि मौजूदा अलनीनो की घटना अप्रैल 2024 तक जारी रहे। इससे न केवल मौसम के मिजाज पर असर पड़ेगा साथ ही जमीन और समुद्र दोनों के तापमान में वृद्धि होगी। इसने जलवायु आपदाओं को भी बढ़ा दिया। पिछले 174 वर्षों के इतिहास की सातवीं सबसे गर्म जनवरी इस वर्ष दर्ज की गई। यह जानकारी नेशनल ओसेनिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (एनओएए) के नेशनल सेंटर फॉर एनवायर्नमेंटल इंफॉर्मेशन (एनसीईआई) द्वारा जारी  रिपोर्ट में सामने आई।
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अब तक का सबसे गर्म नवंबर
नवंबर 2023 भी अब तक का सबसे गर्म महीना साबित हुआ। यूरोप की कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने जानकारी दी कि नवंबर में बढ़ता तापमान एक नए शिखर पर पहुंच गया। नवंबर के दौरान पृथ्वी की सतह के पास हवा का औसत वैश्विक तापमान 14.22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। यह औद्योगिक काल (1850-1900) से पहले की तुलना में करीब 1.75 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म था।

2024 में अलनीनो का असर और गहरा होगा
2024 में मजबूत अल नीनो की संभावना 75% से 80% के बीच है। इसका अर्थ है कि भूमध्यरेखीय समुद्र की सतह का तापमान औसत से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म होगा। इस बात की 30% संभावना है कि तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है। यह ऐतिहासिक रूप से अलनीनो का गहरा असर होगा।

अगले वर्ष सुपर अलनीनो भारत में सामान्य मौसम पैटर्न को बाधित करने का कारण बन सकता है। इससे असामान्य और कभी-कभी मौसम से जुड़ी गंभीर घटनाएं हो सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में असमय भारी वर्षा और बाढ़ का तांडव देखने को मिल सकता है।

नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन की इकाई सीपीसी ने अपनी नवीनतम स्थिति रिपोर्ट में कहा है कि अधिकांश मॉडल संकेत देते हैं कि अलनीनो अप्रैल-जून 2024 तक बना रहेगा और फिर ईएनएसओ-तटस्थ में बदल जाएगा।

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