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लोकसभा में बोले स्वास्थ्य मंत्री: 86% वयस्कों को दी जा चुकी है कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक खुराक, जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए देश में 36 लैब

Fri, 10 Dec 2021 01:29 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार जल्द 100 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करेगी।
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मनसुख मंडाविया - फोटो : ANI
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विस्तार
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संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने कहा कि देश में अब तक 86 प्रतिशत लोगों को कोरोना वैक्सीन की कम से कम एक खुराक दी जा चुकी है। उन्होंने एनके प्रेमचंद्रन, राजीव रंजन सिंह, मनीष तिवारी व अन्य नेताओं की ओर से पूछे गए सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की। 

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार 100 प्रतिशत टीकाकरण के लक्ष्य को पूरा करने के लिए प्रयासरत है और जल्द ही इस लक्ष्य को भी प्राप्त कर लिया जाएगा। कोरोना टीके का स्वास्थ्य पर असर पड़ने के सवाल के जवाब में मंडाविया ने कहा कि कई परीक्षणों, अध्ययनों और ट्रायल के बाद ही टीकों को मंजूरी मिलती है। बिना तथ्य के टीके को लेकर कुछ भी न कहा जाए। क्योंकि इससे लोगों में बेवजह टीके को लेकर झिझक पैदा होगी। 

जीनोम अनुक्रमण के लिए देश में 36 प्रयोगशालाएं
मनसुख मंडाविया ने कहा कि ओमिक्रॉन को लेकर देश के वैज्ञानिक व विशेषज्ञ अध्ययन कर रहे हैं। सभी तथ्य सामने आने के बाद इसको लेकर भी कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना लगातार अपना स्वरूप बदलता रहता है। जीनोम अनुक्रमण के लिए देश में 36 प्रयोगशालाएं हैं। 
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ओमिक्रॉन पर कौन सा टीका कितना असरदार अध्ययन जारी नए स्वरूप पर कौन सा टीका कितना असरदार है वैज्ञानिक इसका अध्ययन कर रहे हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने सवालों के जवाब में कहा कि एक बार अध्ययन पूरा होने के बाद ही आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। दुनियाभर के 59 देशों में ओमिक्रॉन ने दस्तक दे दी है। 

बूस्टर डोज की आवश्यकता का आकलन करें स्वास्थ्य मंत्रालय और एजेंसियां: संसदीय समिति गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने सिफारिश की है कि स्वास्थ्य मंत्रालय को संबंधित एजेंसियों के साथ मिलकर कोरोना वायरस के अलग-अलग स्वरूपों से निपटने के लिए वैक्सीन बूस्टर डोज की आवश्यकता का आकलन करना चाहिए। कोविड-19 के नए ओमिक्रॉन स्वरूप को ध्यान में रखते हुए समिति ने सिफारिश की कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह और राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह मिलकर इस पर निर्णय लें।

लोकसभा में शुक्रवार को पेश एक रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति जानना चाहेगी कि क्या आईसीएमआर और अन्य संबंधित संस्थानों द्वारा देश में विभिन्न स्वरूपों के खिलाफ दिए जा रहे टीकों के प्रभाव के बारे में कोई शोध किया गया है। कोविड-19 महामारी की प्रकृति और वायरस को अप्रत्याशित बताते हुए समिति ने आगाह किया कि सतर्कता और तैयारियों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता है।

समिति ने सिफारिश की है कि गृहमंत्रालय राज्यों को सलाह दे सकता है कि वो परीक्षण सुविधा, आईसीयू बेड और मेडिकल ऑक्सीजन जैसे कोविड-19 के बुनियादी ढांचे को कम न करें, क्योंकि ये वायरस तीसरी लहर को जन्म दे सकता है।

भारतीय टीका प्रमाणपत्र को 108 देशों ने दी मान्यता स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण ने लोकसभा में बताया कि 108 देशों ने भारतीय कोविड प्रमाणपत्र को मान्यता दे दी है। उन्होंने एक प्रश्न के जवाब में विश्व स्वास्थ्य संगठन के आपात इस्तेमाल के लिए दी गई सूची, संयुक्त राष्ट्र खरीद एजेंसी, सदस्य देशों और का डाटा साझा किया, जिन्होंने भारतीय टीका प्रमाणपत्र को मान्यता दी है। मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य इन टीकों और संबंधित उत्पादों को प्रभावित देशों को जल्द से जल्द उपलब्ध कराना है।

भारत में डेल्टा के उप स्वरूप एवाई.4.2 के 18 मामले सरकार ने लोकसभा में बताया कि कोविड 19 डेल्टा के उप स्वरूप एवाई.4.2 के भारत में 18 मामले हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री भारती प्रवीण पवार ने लोकसभा को बताया कि कोरोनो वायरस भी अन्य वायरस की तरह ही विकसित हुआ होगा। उन्होंने कहा कि 3 दिसंबर 2021 तक कुल 18 मामलों में दस गुजरात में, चार तमिलनाडु में, दो असम और एक-एक महाराष्ट्र और तेलंगाना में मिले हैं। एक सदस्य ने पूछा था कि क्या केंद्र सरकार इसको लेकर सचेत है कि कोराना की संभावित तीसरी लहर की चिंता के बीच डेल्टा का यह स्वरूप ब्रिटेन में तेजी से फैल रहा है और भारत में भी आ चुका है।

दोनों खुराक के नौ महीने बाद दी जा सकती है बूस्टर खुराक: आईसीएमआर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने संसदीय समिति को कहा है कि वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के 9 महीने बाद बूस्टर खुराक दी जा सकती है। आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव के अनुसार इस पर वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं और उन्हीं अध्ययनों का हवाला संसदीय समिति के समक्ष रखा गया। किसी भी वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद नौ से 12 महीने तक एंटीबॉडी का स्तर देखने को मिल रहा है। थोड़ी बहुत एंटीबॉडी कम हो सकती हैं लेकिन उनका असर फिर भी रहता है।

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