विपक्षी एकता के लिए नहीं करेंगे जेपीसी की मांग का विरोध: शरद पवार
पूर्व केंद्रीय मंत्री पवार ने इससे पहले कहा था कि अगर संसद में संख्या बल को देखते हुए जेपीसी का गठन किया जाता है, तो सत्तारूढ़ भाजपा के पास बहुमत होगा और इससे इस तरह की जांच के नतीजे पर संदेह पैदा होगा। उन्होंने कहा, "हमारे मित्र दलों (जेपीसी) की राय हमसे अलग है, लेकिन हम अपनी एकता बनाए रखना चाहते हैं। मैंने (जेपीसी जांच की निरर्थकता पर) अपनी राय दी, लेकिन अगर हमारे सहयोगियों (विपक्षी दलों) को लगता है कि जेपीसी जरूरी है तो हम इसका विरोध नहीं करेंगे।"
पवार ने एक मराठी समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा, "हम उनसे (विपक्षी दलों से) सहमत नहीं हैं, लेकिन विपक्षी एकता के लिए हम इस पर जोर नहीं देंगे (कि जेपीसी नहीं होनी चाहिए)।" राज्यसभा सदस्य ने शनिवार को पत्रकारों से कहा था कि वह अदाणी समूह के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए जेपीसी को लेकर पूरी तरह खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त जांच समिति इस मामले से निपटने में 'ज्यादा उपयोगी और प्रभावी' होगी।
प्रधानमंत्री से जुड़े अदाणी समूह का मुद्दा बहुत गंभीर: जयराम रमेश
पवार की टिप्पणी के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राकांपा के इस मुद्दे पर अपने विचार हो सकते हैं, लेकिन समान विचारधारा वाले 19 दलों का मानना है कि 'प्रधानमंत्री से जुड़े अदाणी समूह' का मुद्दा वास्तविक और बहुत गंभीर है। वरिष्ठ सांसद ने कहा कि अगर जेपीसी का गठन होता है तो लोकसभा और राज्यसभा में भाजपा के संख्या बल को देखते हुए समिति में सत्तारूढ़ दल के 14-15 सदस्य होंगे जबकि विपक्ष के पांच से छह सांसद होंगे।
उन्होंने कहा, "समिति की अध्यक्षता भी भाजपा करेगी तो पैनल को कौन नियंत्रित करेगा और रिपोर्ट पर इसका क्या प्रभाव होगा? पवार ने इस बात पर जोर देने की कोशिश की थी कि जेपीसी के पास सीमित गुंजाइश होगी। राकांपा नेता ने कहा था कि इसके बजाय उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त समिति को इस मुद्दे की जांच करनी चाहिए।"
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