फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bombay HC: 'वैवाहिक विवाद सबसे कड़वे मामले', हाईकोर्ट ने महिला से बेटे को थाईलैंड से भारत लाने का दिया निर्देश

Tue, 11 Apr 2023 06:48 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

न्यायमूर्ति आर डी धानुका और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की खंडपीठ ने कहा कि वैवाहिक के विवाद हमारे देश में सबसे कड़वी लड़ाई वाले मुकदमे हैं। खंडपीठ ने कहा कि एक बच्चे का कल्याण उस पर माता-पिता के अधिकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। 
विज्ञापन
bombay high court
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महिला को अपने पंद्रह साल के बेटे के साथ थाईलैंड से भारत आने का निर्देश दिया, ताकि वह अपने पिता और भाई-बहनों से मिल सके। अदालत ने कहा कि वैवाहिक विवादों में बच्चों को चल संपत्ति की तरह माना जाता है। यह देश में सबसे कड़वे मामले हैं। 

विज्ञापन

 

बच्चे का कल्याण उस पर माता-पिता के अधिकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण
न्यायमूर्ति आर डी धानुका और न्यायमूर्ति गौरी गोडसे की खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के विवाद हमारे देश में सबसे कड़वी लड़ाई वाले मुकदमे हैं। खंडपीठ ने कहा कि एक बच्चे का कल्याण उस पर माता-पिता के अधिकारों से ज्यादा महत्वपूर्ण है। अदालत एक व्यक्ति की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें उसने थाईलैंड में अपनी मां के साथ रहने वाले बेटे से मिलने की मांग की थी। 

माता-पिता के बीच कड़वाहट बेटे को लगा झटका
अदालत ने कहा कि लड़के को अपने माता-पिता के बीच कड़वाहट के कारण झटका लगा है और वह अपने पिता से मिलने का इच्छुक है। खंडपीठ ने कहा, हमारे देश में वैवाहिक विवाद सबसे तीखी लड़ाई वाली प्रतिकूल मुकदमेबाजी है। एक समय ऐसा आता है जब जोड़े झगड़े करते हैं, बच्चों को अपनी संपत्ति के रूप में देखते हैं।

पारिवारिक अदालत के निर्देश का पत्नी ने नहीं किया पालन: याचिकाकर्ता
खंडपीठ ने आगे कहा, बच्चों को संपत्ति या संपत्ति के रूप में नहीं माना जा सकता है, जहां माता-पिता का अपने बच्चों के भविष्य और जीवन पर पूर्ण अधिकार होगा। बच्चे का कल्याण सर्वोपरि विचार है, न कि माता-पिता के कानूनी अधिकार। 

विरक्त युगल के तीन  बच्चे हैं। एक महिला के साथ थाईलैंड में है। जब दो अन्य एक बेटा और बेटी अपने पिता के साथ रहते हैं। दोनों बालिग हैं। व्यक्ति ने दावा किया कि सितंबर 2020  में एक पारिवारिक अदालत ने उसकी पत्नी को निर्देश दिया था कि वह उसे, लड़के के बड़े भाई बहनों और दादा-दादी को लड़के (मां के साथ रह रहा) तक पहुंच प्रदान करे, लेकिन उसे इसका पालन नहीं किया। 

लड़के के विचारों का सम्मान करना जरूरी: उच्च न्यायालय
याचिका में कहा गया था कि उच्च न्यायालय को महिला को गर्मी की छुट्टियों में बेटे को भारत लाने का निर्देश देना चाहिए। महिला के वकील ने अदालत से कहा कि वह अपने बेटे के साथ भारत आने को तैयार है, लेकिन पहले यह सुनिस्चित करने के लिए जरूरी आदेश दिया जाना चाहिए कि वह छुट्टी खत्म होते ही अपने बेटे के साथ सुरक्षित थाईलैंड लौट सके।

अदालत ने कहा कि लड़का अपने विचारों और अपनी संभावनाओं को लेकर बहुत स्पष्ट प्रतीत होता है। इसलिए उसे एक व्यक्ति के रूप में माना जाना चाहिए और उसके विचारों का सम्मान करना जरूरी है। 
विज्ञापन

महिला की गिरफ्तारी के लिए कोई शिकायत नहीं कर पाएगा पति
अदालत ने आगे कहा, माता-पिता की जरूरतों और बच्चे के कल्याण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। इसलिए अगर लड़के के विचारों का उचित विचार नहीं किया गया तो यह उसके भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

उच्च न्यायालय ने कहा, बच्चे के लिए विकास के लिए जरूरी है कि उसे अपने माता-पिता और भाई-बहन दोनों का साथ मिले। इसने महिला को निर्देश दिया कि वह अपने बेटे के साथ भारत आए ताकि वह अपने पिता और बड़े भाई-बहनों से मिल सके।

अदालत ने कहा कि पिता, महिला और उनके बेटे के भारत में होने के दौरान उनकी गिरफ्तारी या हिरासत के लिए कोई शिकायत नहीं करेगा या कोई कार्रवाई नहीं करेगा। अदालत ने निर्देश दिया कि संबंधित राज्य और केंद्रीय एजेंसियां यह सुनिश्चित करें कि बाद में उनकी थाईलैंड वापसी में कोई बाधा पैदा न हो। 

और भी पढ़ें...
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें