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आकाश मिसाइल : क्या बीडीएल और बीईएल जैसे पीएसयू के खेल की कीमत चुकाएगी वायुसेना?

Thu, 30 Jul 2020 10:05 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मिसाइल, मिसाइल कंटेनर और भारतीय वायु सेना
  • प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर में उलझी है बीडीएल और बीईएल
  • बीईएल ने कराई गुणवत्ता पर सवाल उठाने वाले कंटेनर की इंट्री
  • वायुसेना को चाहिए बीडीएल का प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर
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आकाश मिसाइल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश के सैन्यबल रक्षा साजो-सामान के लिए देश की पीएसयू पर निर्भर हैं और देश की पीएसयू मिसाइल कंटेनर के खेल में उलझी हैं। ताजा मामला वायुसेना का है। वायुसेना आकाश मिसाइल को युद्धक स्थान पर ले जाने के लिए प्रेशराइज्ड मिसाइल गैस कंटेनर चाहती है। वायुसेना की इच्छी भारत डायनामिक्स (बीडीएल) द्वारा तैयार गुणवत्ता वाले कंटेनर को पाने की है। वायुसेना से रिटायर एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार बीडीएल का कंटेनर बीईएल के कंटेनर की तुलना में काफी उम्दा है। लेकिन बीडीएल सूत्रों के मुताबिक भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड (बीईएल) के खेल ने वायुसेना के सपने पर पानी फेर दिया।

बीईएल के प्रमुख ने माना कि नहीं बनाएंगे प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर

डिफेंस एक्सपो-2020, लखनऊ... बीईएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर एमवी गौतमा। गौतमा ने आकाश प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर को वायुसेना की जरूरत के अनुरूप बना पाने में बीईएल की कमजोरी को स्वीकार कर लिया था। गौतमा ने कहा कि कंटेनर बनाकर सैन्य बलों को मिसाइल देने का काम बीडीएल का है। बीडीएल नहीं विकसित कर पाई, तब बीईएल ने यह बीड़ा उठाया था। गौतमा के अनुसार बीईएल ने कंटेनर को विकसित किया है। इसमें 50 साल तक लीकेज की समस्या नहीं आएगी। 

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यह हीलियम लीक टेस्टिंग में सफल है। हालांकि बीईएल चेयरमैन ने माना कि बीईएल का कंटेनर वजन में बीडीएल के कंटेनर से करीब 100 किग्रा भारी है। यूजर फ्रेंडली के मामले में भी बीईएल का कंटेनर कमजोर है और ट्रांसपोर्टेशन में भी थोड़ी समस्या आ सकती है। बीईएल के सीएमडी ने कहा कि यह कोई रॉकेट साइंस नहीं है और बीईएल कंटेनर नहीं बनाएगा। बीडीएल ने अब एक निजी कंपनी के सहयोग से कंटेनर तैयार करा लिया है। वायुसेना यदि उसको चाहती है तो आपूर्ति करे। बीईएल इसे नहीं बनाएगी।

बीडीएल के सीएमडी सिद्धार्थ मिश्रा की सुनिए

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बीडीएल के सीएमडी ने भी डेफ एक्सपो में बताया कि बीडीएल ने प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर बनाने में कामयाबी पाई है। हम इसे इंड यूजर (सेना) को दे रहे हैं। सेना से कंटेनर को लेकर कोई शिकायत नहीं आई है। बीडीएल जल्द ही सेना को अगले लॉट की आपूर्ति करेगी। बीडीएल के एक अन्य अधिकारी ने माना कि टेस्टिंग के दौरान बीडीएल का प्रेशराइज्ड कंटेनर बीईएल के मुकाबले बहुत अच्छा है। इसमें गैस को भरना, होल्ड करना, आवश्यकता अनुसार डिफ्यूज करना आसान है। बीडीएल का कंटेनर लेह-लद्दाख के माइनस तापमान से लेकर पोखरण, लाठी, महाजन रेंज में भी फिट है।

तो बीईएल ने ही कौन सा खुद कंटेनर बनाया?

बीडीएल के सूत्रों के मुताबिक बीईएल ने भी खुद कंटेनर विकसित नहीं किया है। उसने भी एक निजी कंपनी के सहयोग से ही विकसित कराया है। लेकिन बीईएल का कंटेनर भारी है। उसमें गैस को भरने, होल्ड करने और आवश्यकता अनुसार डिफ्यूज करने की प्रक्रिया जटिल है। बीडीएल के अधिकारियों की मानें तो वायुसेना ने बीईएल द्वारा पेश किए गए प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर के मॉडल को रिजेक्ट कर दिया था। वायुसेना ने उसमें कई सुधार की जरूरत बताई थी और बीईएल उसे दूर नहीं कर पा रही थी। इसके लिए वायुसेना ने कई बार वायुसेना को अपने कंटेनर  को सुधारने का समय दिया, लेकिन बीईएल उसे पूरा नहीं कर पाई।

क्या है दोनों के प्रेशराइज्ड गैस कंटेनर में अंतर

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वायुसेना के एयर वाइस मार्शल की अध्यक्षता में बीडीएल और बीईएल के कंटेनर की गुणवत्ता के लिए जांच कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने पाया कि बीडीएल की तुलना में बीईएल का कंटेनर वजन में भारी, ट्रांसपोर्टेशन के लिहाज थोड़ी परेशानी वाला, युद्धकाल के समय में उपयोग में लाने में थोड़ा कठिनाई पैदा करता है। इससे काफी अधिक टोगल क्लैंप की सहायता से तैयार किया गया है। इसलिए इसके आपरेशन में समय भी ज्यादा लगेगा। वायुसेना के अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि बीडीएल के कंटेनर के उपयोग के लिए एक वायुसैनिक पर्याप्त है। जबकि बीईएल के कंटेनर के लिए कम से कम दो वायुसैनिकों की आवस्यकता पड़ेगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरक्राफ्ट के लैंडिंग के समय वायुमंडलीय दाब की बढ़ती आवस्था के बीच बीईएल के कंटेनर में विस्फोट संभव है। इसमें गैस का भरना और निकालना थोड़ा जटिल प्रक्रिया है। वायुसैनिक अधिकारी की रिपोर्ट के अनुसार एक एमटीवी में बीईएल के छह कंटेनर ही बमुश्किल ले जाए जा सकेंगे। जबकि बीडीएल के छह से अधिक कंटेनरल आसानी से ले जाए जा सकते हैं। बीडीएल का कंटेनर, बीईएल के कंटेनर से कम वजनी है। यह एक बड़ी खासियत है और बीईएल को भी अपने कंटेनर को हल्का, इसी स्तर का विकसित करना चाहिए।

अब देखिए नया खेल, बीडीएल के अधिकारी भी चुप हैं?

भारत डायनामिक्स लिमिटेड सेना, वायुसेना को मिसाइल की आपूर्ति करनी है। वायुसेना बीईएल से रक्षा साजो-सामान लेती है। आकाश मिसाइल प्रणाली में रडार और अन्य उपकरणों को विकसित करने में बीईएल का बड़ा योगदान है। इस तरह से वायुसेना बीईएल की उपभोक्ता है। बीडीएल के अधिकारी बताते हैं आकाश मिसाइल गैस कंटेनर उपलब्ध कराने में बीईएल ने यहां खेल कर दिया है। वह सीधे कंटेनर देने की जिम्मेदारी से पीछे हट गई, लेकिन जिस निजी कंपनी से कंटेनर विकसित कराया था, उसे आगे कर दिया है। 

बीडीएल के अधिकारियों के अनुसार वायुसेना ने अभी भी बीईएल के कंटेनर को परीक्षण करके अनुमति नहीं दी है। बीईएल ने कंटेनर के लिए अनुमति लेने की खानापूर्ति भर की है। वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि बीईएल के प्रेशर में वायुसेना के कंटेनर के लिए पुरानी शर्त पर 2020 में निविदा आमंत्रित की गई। इसमें बीडीएल और बीईएल द्वारा विकसित कराए गए कंटेनर ने प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया और बीईएल का कंटेनर एल-1 आ गया है। इस तरह से भारतीय वायुसेना तुलना में खराब प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर लेने के लिए मजबूर हो गई है।

क्यों चाहिए प्रेशराइज्ड मिसाइल गैस कंटेनर

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मिसाइल को अनुकूल वातावरण देने के लिए प्रेशराइज्ड मिसाइल कंटेनर की जरूरत पड़ती है। कंटेनर में मिसाइल को नाइट्रोजन गैस के प्रेशर में अनुकूल तापमान देकर रखा जाता है। ताकि किसी तरह की नमी आदि के दुष्प्रभाव से मिसाइल को बचाया जा सके। रक्षा वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे मिसाइल अधिक समय तक सुरक्षित और प्रयोग में लाने के योग्य रहता है। दुनिया के विकसित देश प्रेशराइज्ड मिसाइल गैस कंटेनर में ही अपनी मिसाइल का ट्रांसपोर्टेशन करते हैं। भारत में इससे पहले आकाश मिसाइल को सामान्य लोहे के कंटेनर में रखा जा रहा था, लेकिन सैन्य बलों की मांग, पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर के प्रयास ने इसे देश में अमली जामा पहनाया।
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