'टीटीजेड' उत्तरप्रदेश में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा तथा राजस्थान के भरतपुर जिले के करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसमें केवल पर्यावरण अनुकूल, गैर प्रदूषणकारी छोटे, लघु और सूक्ष्म स्तरीय उद्योगों की ही अनुमति दी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह ताज ट्रेपेजियम जोन (TTZ) में आने वाली और रोकी गई सरकारी परियोजनाओं के आवेदनों पर जनवरी में सुनवाई करेगी।
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'टीटीजेड' उत्तरप्रदेश में आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और एटा तथा राजस्थान के भरतपुर जिले के करीब 10,400 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। इसमें केवल पर्यावरण अनुकूल, गैर प्रदूषणकारी छोटे, लघु और सूक्ष्म स्तरीय उद्योगों की ही अनुमति दी जा सकती है। शीर्ष कोर्ट इन परियोजनाओं के चलते क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक ताजमहल समेत अन्य विरासतों के संरक्षण व पर्यावरण संबंधी पहलुओं को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है।
जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ, जो इस मामले से जुड़े कुछ आवेदनों पर विचार कर रही है, को सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सरकारी कंपनी रेल विकास निगम लि. के आवेदनों के बारे में सूचित किया। इस पर पीठ ने कहा कि इन्हें जनवरी में कोर्ट में सूचीबद्ध किया जाएगा। रोके गए सभी सरकारी प्रोजेक्टों के आईए नंबर हमें दें, उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ में जस्टिस बीआर गवई व जस्टिस बीवी नागरत्ना भी शामिल हैं।
रात में ताज के दीदार के लिए आनलाइन टिकट मिलें
पीठ ने कहा कि जो भी सरकारी प्रोजेक्ट रोका गया है, उस पर हम उन पर अगली तारीख पर सुनवाई करेंगे। एक वकील ने कोर्ट से कहा कि उनके द्वारा दायर अर्जी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। यह अर्जी रात में ताज महल देखने के लिए आनलाइन टिकट से संबंधित है। उन्होंने कहा कि दिन में ताज देखने के लिए आनलाइन टिकट मिलते हैं, लेकिन रात में दीदार के लिए टिकट लेने के लिए कतार में खड़ा होना पड़ता है। इस पर पीठ ने कहा कि हम अभी कुछ सरकारी परियोजनाओं के मामले सुन रहे हैं, आनलाइन टिकट समेत अन्य मामले इंतजार कर सकते हैं। इसमें जल्दी क्या है? इस पर तत्काल सुनवाई क्यों होना चाहिए?