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MCD: क्या इस अवसर को भुना पाएंगे दिल्ली के मुख्यमंत्री? एमसीडी चमकी तो 2024 में खिल जाएंगे अरविंद केजरीवाल

अमित शर्मा
Updated Sun, 11 Dec 2022 05:33 PM IST

सार

क्या इस बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए क्या अरविंद केजरीवाल के पास पर्याप्त समय और संसाधन है? क्या अरविंद केजरीवाल दिल्ली को चमकाने में कोई बड़ा बदलाव कर पाने में समर्थ होंगे? 
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एमसीडी में आप - फोटो : अमर उजाला


क्या इस बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए क्या अरविंद केजरीवाल के पास पर्याप्त समय और संसाधन है? क्या अरविंद केजरीवाल दिल्ली को चमकाने में कोई बड़ा बदलाव कर पाने में समर्थ होंगे? 


दुनिया के सभी बड़े शहरों की तरह दिल्ली भी साफ-सफाई और वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से जूझ रही है। दिल्ली में घरों, अस्पतालों और औद्योगिक इकाइयों से पैदा  होने वाला कूड़ा  राजधानी की गंदगी का बड़ा कारण है। अभी तक इसकी सफाई के लिए बहुत अच्छा काम नहीं किया जा सका है। यह तब हुआ है जबकि दिल्ली की हर गली-मोहल्ले से कूड़ा हटाने के लिए पर्याप्त सफाई कर्मचारी और मशीनी तकनीकी उपलब्ध है। लेकिन सफाई कर्मचारियों को समय से वेतन न दे पाने और उचित मानवीय प्रबंधन न कर पाने के कारण यह समस्या लगातार गंभीर होती गई है। वायु प्रदूषण के लिए केजरीवाल सरकार दूसरे राज्यों और केंद्र के सहयोग की बात कर सकती है, लेकिन दिल्ली का कचरा हटाने के लिए उसके पास किसी दूसरे को जिम्मेदार बताने का कोई अवसर नहीं होगा। 


शहरी मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहला कदम है जहां अरविंद केजरीवाल चाहें तो बड़ा प्रदर्शन कर सकते हैं। इंदौर, सूरत और वडोदरा नगर निगमों ने यह कार्य करके दिखाया है। इच्छाशक्ति हो तो यह कार्य दिल्ली में भी किया जा सकता है। हर गली-वार्ड के लोगों के पास सफाई की शिकायत करने के लिए ह्वाट्सअप पर आसान सुविधा होनी चाहिए। यदि ऐसा सिस्टम बनाकर उस पर तत्काल कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जा सके तो आवासीय इलाकों से गंदगी को समाप्त करना बहुत मुश्किल कार्य नहीं है। किसी शिकायत पर कार्रवाई न होने पर सफाई कर्मियों और उनके वरिष्ठ अधिकारियों को दंडित किए जाने की भी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे सफाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सुनिश्चित की जा सके।


मेट्रो का आदर्श

इसी दिल्ली शहर में मेट्रो ने साफ-सुथरा परिवहन उपलब्ध कराने में सफलता हासिल की है। मेट्रो ने यह भी साबित कर दिया है कि यदि नागरिकों को सफाई के लिए प्रशिक्षित किया जाए, और इसके प्रति कड़ाई बरती जाए तो शहर को साफ-सुथरा वातावरण दिया जा सकता है। इसके लिए नागरिकों को सफाई के लिए मानसिक स्तर पर तैयार करने की जरूरत होगी। दिल्ली के मामले में अनपढ़, अल्पशिक्षित प्रवासी जनता होने के कारण यह कार्य कुछ कठिन अवश्य है, लेकिन मेट्रो का उदाहरण बताता है कि यह किया जा सकता है।  

 

स्वास्थ्य सुविधा को लोगों तक पहुंचाने का समय

यदि दिल्ली के लोगों को उनके मोहल्ले में ही प्राथमिक स्तर की बेहतर स्वास्थ्य सेवा मिल सके तो इससे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। अब अरविंद केजरीवाल के पास नगर निगम के रूप में दिल्ली की प्राथमिक चिकित्सा सेवा भी है। ऐसे में उनके पास लोगों को उनके घर के पास में ही एक बेहतर स्वास्थ्य सेवा देने का स्वर्णिम अवसर है। दिल्ली सरकार ने मोहल्ला क्लीनिक के रूप में एक बड़ा बदलाव किया था, लेकिन आरोप हैं कि मोहल्ला क्लीनिक मानकों के अनुरूप काम नहीं कर रहे हैं। अब चूंकि, दिल्ली सरकार के पास हर वार्ड में प्राथमिक चिकित्सा तंत्र भी उपलब्ध है, वे टीके लगाने, ओपीडी सेवा देने, विभिन्न जांच कराने और आवश्यक मुफ्त दवाएं देने का काम बेहतरीन ढंग से मानक के अनुरूप कर सकते हैं। 


जल प्रबंधन

अरविंद केजरीवाल सरकार अपने कई दावों के बाद भी अभी तक दिल्ली के सभी इलाकों में पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं करा पाई है। दिल्ली की बड़ी समस्या है कि उसके पास अपना कोई बड़ा जल स्रोत नहीं है। जल उपलब्धता के लिए उसे यमुना के जल पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन इसके बाद भी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में जलाशय विकसित कर, पुराने जलाशयों का जीर्णोद्धार कर, बड़े भवनों, भूखंडों में वर्षा जल का संचयन और यमुना के किनारों पर बड़े जलाशय बनाकर इस कमी को कुछ हद तक पाटा जा सकता है। हालांकि, यह लंबे समय में होने वाले कार्य हैं। 
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यमुना की सफाई

यमुना में प्रदूषण का बड़ा कारण औद्योगिक इकाइयों से इसमें बहाया जाने वाला कचरा है। इसके लिए यूपी-उत्तराखंड के कई शहरों को भी जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। लेकिन दिल्ली सरकार को अपने स्तर पर राजधानी के औद्योगिक इकाइयों को गंदा रसायन युक्त जल यमुना में बहाने से रोकना होगा। इसके लिए कठोर मानक तय करने होंगे। साथ ही उन्हें गंदे जल के निस्तारण के लिए भी बाध्य करना होगा।  


ट्रैफिक व्यवस्था 

शहर की वायु गुणवत्ता का स्तर सुधारने के लिए सार्वजनिक परिवहन को और ज्यादा बेहतर करने की जरूरत है। सरकार की कोशिश होनी चाहिए कि हर आधे किलोमीटर के अंदर लोगों को पर्याप्त आरामदायक सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई जाए जिससे वे निजी वाहनों की तरफ आकर्षित न हों। आंतरिक रिंग रोड विकसित कर, ज्यादा व्यस्त इलाकों में पूरी तरह ई-वाहन अनिवार्य करने और पुराने वाहनों को पूरी तरह रोड से हटाने से इस व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है।   


भ्रष्टाचार पर अंकुश

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सरकार के कई कार्यों में पूरी तरह ऑनलाइन व्यवस्था को अपनाकर भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में सफलता पाई है। अब इसी तरह का प्रयोग नगर निगम में भी किया जाना चाहिए। नगर निगम के यथा संभव कार्यों को ऑन लाइन उपलब्ध कराकर पार्षदों और निगम अधिकारियों के माध्यम से होने वाले भ्रष्टाचार की संभावनाओं को समाप्त करना चाहिए। इससे जनता के बीच उसकी छवि और विश्वसनीयता बढ़ेगी।  


बेहतर कार्य खोलेगी बेहतर राजनीतिक अवसर की राह

यदि वे इनमें से कुछ बदलाव करने में समर्थ हो पाते हैं तो इससे अरविंद केजरीवाल की छवि एक आदर्श व्यवस्था देने वाले आधुनिक नेता की बन सकेगी जिसका उन्हें अगले लोकसभा चुनाव में लाभ हो सकता है। उनके पास आतिशी मार्लेना, जैस्मिन शाह और संदीप पाठक जैसे योग्य लोगों की टीम है जिनके नए विचारों से दिल्ली सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन की दिशा में बेहतर कार्य किए हैं। दिल्ली नगर निगम में बेहतर कार्य आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल के लिए राष्ट्रीय राजनीति में नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।  

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