अपनी याचिका में पति ने आरोप लगाया कि फरवरी 2012 में हुई शादी के एक महीने बाद पत्नी ने संयुक्त परिवार में रहने से इनकार कर दिया और पति के साथ अलग जगह रहने की मांग की। रिश्तेदारों के रिश्ते बिगड़ गए और पत्नी ने अक्सर झगड़े शुरू कर दिए और बच्चे न होने के लिए भी पति को दोषी ठहराया।
पत्नी ने 2013 में ससुराल छोड़ दिया और पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 498 ए के तहत क्रूरता का मामला दर्ज किया। पति और रिश्तेदारों को बाद में उस मामले में हाईकोर्ट ने बरी कर दिया गया था। इसके बाद पति ने अलग से तलाक का केस दायर किया।
पत्नी ने दहेज उत्पीड़न का भी लगाया आरोप
पत्नी ने क्रूरता को आधार बनाकर किए गए मुकदमे में पति और ससुराल वालों पर दहेज के लिए उत्पीड़न का भी आरोप लगाया। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे भोजन और चिकित्सा से वंचित रखा गया था और उसका भाई ही उसकी देखभाल करता था।