पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्रचीर से पाक अधिकृत कश्मीर और बलूचिस्तान में मानवाधिकारों के हनन का मामला उठाया था। पीएम मोदी के भाषण में इनके जिक्र की वजह क्या थी, यह अब सामने आया है। जिन शीर्ष अफसरों की सलाह पर पीएम का भाषण तैयार किया गया था, उनमें से एक ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पीएम को अधिकारियों ने बलूचिस्तान और पीओके की बात भाषण में नहीं करने की सलाह दी थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक अधिकारियों ने कहा था कि भारत और पाक दोनों परमाणु संपन्न देश हैं, भाषण में बलूचिस्तान और पीओके की बात करना ठीक है, लेकिन 15 अगस्त के मौके पर ऐसी बात करने से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा सकता है।
अधिकारियों के सुझाव को गृहमंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने दरकिनार कर दिया था। पाक की तरफ से लगातार हो रही कश्मीर विरोधी गतिविधियों से मंत्रिमंडल के सभी नेता और पीएम मोदी गुस्सा थे। सभी ने पाकिस्तान के प्रति आक्रामक रुख अख्तियार करने की सलाह पीएम को दी थी। पीएम ने भी सभी की राय से सहमति जताई और भाषण में बलूचिस्तान और पीओके का जिक्र किया।
अधिकारी के मुताबिक राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए हमें हर उस कदम पर अमल करना चाहिए, जो जरूरी है। वहीं, पीएमओ, विदेश मंत्रालय, रक्षा और गृह मंत्रालय ने पीएम के भाषण पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इनकार किया।