इस बात पर कई सवाल उठे कि कैप ड्यूटी के लिए मिग-21 विमानों का प्रयोग किया ही क्यों जा रहा था? भारतीय वायुसेना में इस विमान का आगमन 56 साल पहले हुआ था। बीते कुछ दशकों में मिग-21 विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं के चलते इसे उड़ता कफन (फ्लाइंग कॉफिन) तक नाम दे दिया गया था।
हालांकि, वायुसेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया पुलवामा आतंकी हमले के बाद से अलर्ट का स्तर बढ़ाया गया था और तब से ही विभिन्न विमान कैप ड्यूटी के लिए लगाए जा रहे थे। शुक्रवार की रात सुखोई30 व मिग-29 विमान हवा में थे, वहीं सुबह मिग-21 तैनात किए गए थे।
वायुसेना के एक अधिकारी ने कहा कि मिग-21 हमारी इनवेंटरी का हिस्सा हैं। हमारे पास कैप ड्यूटी के लिए कई विमान हैं और जब पाक के विमान भारतीय सीमा में घुसे तब मिग-21 ही हवा में थे और इसीलिए उन्होंने पाक के एफ-16 विमानों को चुनौती दी।
बता दें कि स्वदेशी विमान तेजस को मिग-21 की जगह लाने की तैयारी थी लेकिन तेजस के निर्माण में आ रही देरी के चलते वायुसेना मिग-21 का प्रयोग करने के लिए मजबूर है।