इसका बड़ा कारण नीतीश-लालू सरकार का जातिगत सर्वे वाला दांव है जिसके बूते महागठबंधन और इंडिया गठबंधन को उम्मीद है कि वह भाजपा का विजय रथ रोकने में कामयाब रहेगी। खुद भाजपा का इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशीलता से जवाब देना भी यह बताता है कि भाजपा को भी इस मुद्दे से नुकसान होने' की आशंका है। यही कारण है कि वह इस मुद्दे का विरोध नहीं कर पा रही। उलटे अमित शाह ने भी साफ़ कह दिया है कि भाजपा जातिगत जनगणना के विरोध में नहीं है, बल्कि वह इन मुद्दों पर राजनीति नहीं करती।
सभी सीटों पर जीत का लक्ष्य
लेकिन इस मुद्दे की गंभीरता ही है कि भाजपा के इस दूसरे सबसे बड़े स्टार प्रचारक ने बिहार के हर कोने की यात्रा कर ली है। आज की मुजफ्फरपुर की यात्रा से भी उन्होंने तिरहुत और चंपारण क्षेत्र की आठ लोकसभा सीटों को साधने की कोशिश की है। यह भी ध्यान देने की बात है कि यह क्षेत्र पिछड़ी जातियों में आने वाले निषाद-मल्लाह बहुल है। इस वर्ग को साधने की कोशिश में ही अमित शाह ने कहा कि यदि नीतीश कुमार पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध हैं तो उन्हें घोषणा करनी चाहिए कि अगला मुख्यमंत्री पिछड़ी जाती से ही होगा। लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे क्योंकि वे पिछड़ी जातियों का विकास नहीं करना चाहते, बल्कि वे केवल जाती के नाम पर राजनीति करते हैं।
कैसे साधेंगे अति पिछड़े-महादलित समाज को
भाजपा प्रवक्ता जयराम विप्लव ने अमर उजाला से कहा कि इस बात में कोई संदेह नहीं कि नीतीश कुमार और लालू यादव ने इन जातियों को केवल राजनीति के लिए इस्तेमाल किया, जबकि केंद्र सरकार ने अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से इन्हीं जातियों का विकास किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की राशन योजना, स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना से इन्हीं वर्गों को सीधे तौर पर लाभ मिला है। पीएम विश्वकर्मा योजना से तो इन्हीं गरीब कामगर 18 जातियों को लाभ पहुंचाया गया है।
जयराम विप्लव ने कहा कि वे इन जातियों के विकास के सहारे ही लालू-नीतीश कुमार के जातिगत जनगणना के दांव को मात देंगे। भाजपा नेताओं का मानना है कि उत्तर प्रदेश की तरह अब बिहार में भी वे जातिगत राजनीति को ध्वस्त करने में कामयाब रहेंगे।