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आखिर चीन, पीएम मोदी के अमेरिकी दौरे से खुश क्यों है...?

Fri, 23 Jun 2017 06:47 PM IST
बीबीसी
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मोदी और ट्रंप - फोटो : bbc
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भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते अमेरिका जाने वाले हैं। डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी की यह पहली अमेरिकी यात्रा होगी। मोदी की इस यात्रा को लेकर चीनी मीडिया में भी चर्चा है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को देखना दिलचस्प होगा।
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मोदी के दौरे को लेकर इस चीनी अखबार ने एक विश्लेषण प्रकाशित किया है। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''भारत और अमेरिका के आर्थिक संबंधों को हमेशा चीन और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों की कसौटी पर नहीं देखा जा सकता है। इसकी मुख्य वजह यह है कि भारत विदेशी निवेश और बाजार खोलने के मामले में पीछे रह जाता है।''

अखबार ने लिखा है, ''अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति का एलान कर रखा है। अमेरिका फर्स्ट ट्रंप का केवल नारा नहीं है बल्कि यह उनकी नीति है।
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अगर ट्रंप अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में हितों से जुड़े सवालों को उठाते हैं और भारत इस दौरान मार्केट को और खोलने का वादा करता है तो यह चीन के भी हक में होगा क्योंकि चीन भी भारत का अहम आर्थिक साझेदार है. ऐसे में मोदी की अमरीकी यात्रा पर चीन की नजर टिकी हुई है।''

संबंध बेहतर करने को इच्छुक

डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : bbc
चीन के इस सरकारी अखबार ने लिखा है, ''मोदी के सत्ता में आने के बाद से भारत की जीडीपी विकास दर तेजी से बढ़ रही है. इस वजह से भारत का आत्मविश्वास बड़ी शक्ति बनने के मामले में बढ़ा है। भारत को अमरीकी सहयोग से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसीलिए मोदी सरकार अमेरिका के साथ संबंध बढ़ाने के लिए इच्छुक है।''

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''कई अमेरिकी कंपनी भारत में तेजी से बढ़ते उपभोक्ता मार्केट के कारण उम्मीद लगाए बैठे हैं लेकिन भारत के भीतर स्थानीय सरकारों के आर्थिक संरक्षणवाद की नीति के कारण बाधा अब भी बनी हुई है। उदाहरण के तौर पर अमेरिकी रिटेल कंपनी वॉलमार्ट भारत में आना चाहती है लेकिन कई तरह की पाबंदियों के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है।'' अखबार ने लिखा है, ''ट्रंप आर्थिक मुद्दों जिनमें निवेश की सीमा को खत्म करने और आयात-निर्यात पाबंदी पर को खत्म करने जैसे मुद्दों को मोदी के सामने उठा सकते हैं। अपने पूर्ववर्ती की तुलना में मोदी ने आर्थिक सुधारों के मामले में खुद को ज्यादा खुला रखा है।''

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, ''2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी ने आर्थिक सुधारों से जुड़े कई क़दम उठाए। जीएसटी से भारत भारत में निवेश का एक वातावरण बनेगा। मोदी और ट्रंप की मुलाकात के बाद भारत आर्थिक सुधार से जुड़े और कदमों को उठा सकता है। ट्रंप मोदी के सामने मुद्दा उठा सकते हैं कि अमेरिकी कंपनियों के साथ भी समान व्यवहार किया जाए।''
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चीन को लाभ मिलेगा

भारत और चीन - फोटो : bbc
चीन के इस सरकारी अखबार ने लिखा है, ''अगर भारत में निवेश का माहौल बनता है तो इससे न केवल अमेरिकी कंपनियों को फायदा होगा बल्कि चीन को भी लाभ मिलेगा। ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति के कारण भारत और अमेरिका की साझेदारी में चुनौतियां भी हैं। दोनों की मुलाकात में इसका असर भी दिख सकता है। चीन के लोगों की इस मुलाकात पर नजर बनी हुई है क्योंकि इससे चीन का भी हित जुड़ा हुआ है।''

अखबार ने लिखा है, ''उदाहरण के तौर पर ट्रंप प्रवासी नीतियों में बदलाव कर रहे हैं। इसमें एचबीवन वीजा भी शामिल है। एचबीवन वीजा से भारत और चीन को सबसे ज्यादा फायदा है। एचबीवन वीजा को सीमित करने से भारतीय आईटी सेक्टर के लिए बुरी खबर है। इसके साथ ही जो चीनी स्टूडेंट अमेरिका में पढ़ रहे हैं उन पर भी असर पड़ेगा।'' एचबीवन वीजा का मुद्दा सुलझेगा। ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि एचबीवन वीज़ा के मामले में चीन भारत के साथ खड़ा है। अखबार के मुताबिक चीन को उम्मीद है कि मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान एचबीवन वीजा का मुद्दा सुलझा लिया जाएगा।

चीनी अखबार ने लिखा है, ''दोनों नेताओं की बाचचीत में जलवायु का मुद्दा भी रहेगा। सीएनएन के मुताबिक भारत ने ट्रंप की उस टिप्पणी को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि पेरिस समझौते के कारण भारत अरबों डॉलर मदद हासिल करेगा। मोदी और ट्रंप की मुलाक़ात में जलवायु का मुद्दा भी शामिल रहेगा।'' अखबार ने लिखा है, ''अमेरिका और भारत की आर्थिक साझेदारी फिलहाल चीनी-अमेरिकी साझेदारी से कम है। दोनों देशों के द्विपक्षीय समझौतों पर एचबीवन वीजा और पेरिस समझौते का असर रहेगा। अगर मोदी और ट्रंप इन मुद्दों को सुलझाने में कामयाब रहते हैं तो यह चीन के भी हक में होगा।''
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