दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने राहुल गांधी के जन्मदिन पर पूर्व लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की और उन्हें संविधान की प्रति सौंपी। इसी तरह कांग्रेस ने भाजपा के दिल्ली के सभी सात सांसदों और कुछ अन्य प्रमुख नेताओं से भी मुलाकात की और उन्हें भी संविधान की प्रति सौंपी।
देवेंद्र यादव ने भाजपा नेताओं को संविधान की प्रतियां देने के बाद आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने अपने कार्यकाल के दौरान संविधान में अनेक ऐसे बदलाव किये हैं जिससे जनता के मन में संदेह पैदा होता है। उन्होंने कहा कि सांसदों को जनता ने संविधान की रक्षा करने और उसके अनुसार चलने का जनमत दिया है। संविधान की प्रति देकर वे यही संदेश भाजपा नेताओं को दे रहे हैं।
ऐसा क्यों कर रही कांग्रेस?
दरअसल, पूरे लोकसभा चुनाव में विपक्ष ने भाजपा पर यह आरोप लगाया था कि वह 400 सीटें जीतकर देश के संविधान में बड़ा बदलाव करना चाहती है। राहुल गांधी ने अपनी जनसभाओं में संविधान की प्रति लहराते हुए इस बात की आशंका जाहिर की थी कि यदि भाजपा प्रचंड बहुमत से सत्ता में आ जाती है तो वह बाबा साहब अंबेडकर के बनाए संविधान को समाप्त कर देगी। भाजपा ने विपक्ष के इन आरोपों को बेबुनियादी आरोप बताकर खारिज करने का काम किया था।
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद यह माना जा रहा है कि विपक्ष का यह दांव काम कर गया। जनता के एक वर्ग में इस बात की आशंका पैदा हो गई कि सरकार संविधान में बड़े बदलाव कर सकती है। जनता की आशंका को यह बल भाजपा के ही कुछ नेताओं के बयानों से भी मिला जिसमें उन्होंने चुनाव जीतने के बाद संविधान में बड़ा बदलाव करने की बात कह दी। माना जा रहा है कि इससे सरकार को नुकसान हुआ और विपक्ष का यह दांव काम कर गया। भाजपा लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने से चूक गई।