भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 6 महीने की अंदर ही उसे लोकसभा चुनाव के लिए जाना है। ऐसे में वह किसी ऐसे चेहरे पर दांव खेलना चाहेगी जो उसे आने वाले लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत दिला सके। इसके लिए सामाजिक समीकरणों को भी साधा जाएगा। भाजपा नेतृत्व ऐसे किसी नेता को नाराज भी नहीं करना चाहेगा, जो लोकसभा चुनाव में उसके लिए मुसीबत बने।
विधानसभा चुनाव में शानदार सफलता हासिल करने के बाद भाजपा में मुख्यमंत्री पद की दौड़ शुरू हो गई है। अलग-अलग नेता अपने-अपने तरीके से मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा की ओर से दो बार राजस्थान की मुख्यमंत्री रह चुकी वसुंधरा राजे सिंधिया ने आज अपने जयप्रकाश स्थित आवास पर भाजपा विधायकों को लंच और डिनर कराकर यह दिखाने की कोशिश की है कि उनके पास कई विधायकों का समर्थन है। इस तरीके से वह पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व पर उन्हें मुख्यमंत्री घोषित करने के लिए दबाव बनाना चाहती हैं। हालांकि, भाजपा के सूत्र बता रहे हैं कि उनकी यह रणनीति फिलहाल काम नहीं करने वाली। पार्टी नेतृत्व पर्याप्त समय लेकर निर्वाचित प्रतिनिधियों से बात करके ही कोई निर्णय लेगा।
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वसुंधरा राजे सिंधिया के आवास पर भोजन करने के लिए आज लगभग 20 विधायक पहुंचे। कई विधायकों ने कहा है कि वसुंधरा राजे सिंधिया पार्टी की बड़ी नेता हैं। राजस्थान में वे बहुत लोकप्रिय हैं और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। साथ ही विधायकों ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी जो भी फैसला लेगी, वे उसके साथ हैं। विधायकों के इस खुले स्वीकार से यह भी साफ हो गया है कि पार्टी में कोई अलग गुट बनने की कोई संभावना नहीं है। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व जिसे भी अवसर देगा, पार्टी पूरी तरह से उसके साथ एकजुट हो जाएगी।
भाजपा नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि 6 महीने की अंदर ही उसे लोकसभा चुनाव के लिए जाना है। ऐसे में वह किसी ऐसे चेहरे पर दांव खेलना चाहेगी जो उसे आने वाले लोकसभा चुनाव में बड़ी जीत दिला सके। इसके लिए सामाजिक समीकरणों को भी साधा जाएगा। भाजपा नेतृत्व ऐसे किसी नेता को नाराज भी नहीं करना चाहेगा, जो लोकसभा चुनाव में उसके लिए मुसीबत बने।
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यही कारण है कि भाजपा नेतृत्व सभी दावेदारों से बातचीत करके ही कोई निर्णय लेना चाहता है। माना यह भी जा रहा है कि भाजपा वसुंधरा राजे सिंधिया को भी नाराज नहीं करना चाहेगी क्योंकि राजस्थान में वे बहुत लोकप्रिय हैं और आज भी मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग उनके साथ जुड़ा हुआ है। लोकसभा चुनावों के ठीक पहले भाजपा इस वर्ग को भी नाराज नहीं करना चाहेगी।
दरअसल, विधानसभा चुनाव घोषित होने के पहले से ही भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और वसुंधरा राजे सिंधिया के बीच सब कुछ ठीक न होने की बात कही जा रही थी। एक रणनीति के तहत भाजपा ने राजस्थान सहित किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं किया। इसे पुराने चेहरों के नाम पर होने वाली गुटबाजी को रोकने और उनके नाम पर मतदाताओं के बीच किसी नकारात्मक लहर को रोकने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा था। फिलहाल भाजपा की रणनीति सफल साबित हुई और उसने तीन बड़े राज्यों में बड़ी जीत हासिल की।