अभिलाष टॉमी अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल पर लिखते हैं
'जब मैं 34 साल का था, दुनिया भर की समुद्री यात्रा पर मैं अकेला निकल पड़ा। मुझे कोई सिखाने वाला नहीं था। मैं 14 साल तक अपने इस सपने को साथ लिए था इसलिए हासिल करने तक इसे जाने नहीं दिया।
151 दिनों तक जब मैं समुद्र में था, मैंने नाव का ख्याल रखा और साथ ही मैंने खुद का ख्याल रखा, और कभी-कभी थकान, पानी की कमी, लगातार तूफान, ठंड, गर्मी और सब कुछ झेला। यह सब चीजे महासागरों को सबसे चुनौतीपूर्ण माहौल देती है और आपको इससे निपटना होता है। मुझे 100 से कम लोगों के एक विशेष क्लब में शामिल होने में 14 साल लग गए। मैं ऐसा करने वाला पहला भारतीय और दूसरा एशियाई बन गया।
'अब मैं जमीन पर जो कुछ भी करता हूं, उसमें मैं उन तकनीकों का इस्तेमाल करता हूं जो मैंने समुद्र से सीखा है। मेरे पास किसी भी समस्या को दूर करने के लिए अत्यधिक दृढ़ता और ताकत है। जब तक किसी भी परेशानी का समाधान मैं खुद न निकाल लूं तब तक मैं कोशिश करता रहता हूं। मैं साहसी हूं, और इसलिए, स्वाभाविक रूप से एक जोखिम लेने वाला हूं। प्रेम, सुकून, जुनून और अलगाव के साथ कई कोणों से किसी भी स्थिति को देख सकता हूं। यह मुझे समझने में मदद करते हैं। वह लिखते हैं, 'समुद्र के एकांत ने मुझे असामाजिक नहीं बनाया है। इसने दूसरों की जरूरतों के लिए अधिक संवेदनशील बनाया है।'
सेना में कमांडर होने के आलावा अभिलाष रेकॉन पायलट और नाविक भी हैं। वह दुनिया के बहुत सारे हिस्सों में मोटिवेशनल स्पीच भी देते रहे हैं। उन्हें नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड मिल चुका है और कीर्ति चक्र से भी सम्मानित हैं। दुनिया में केवल 79 लोग ऐसे हैं जिन्होंने दुनिया की समुद्री यात्रा की है।