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Kolkata Doctor Case: हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक ने उठाए जिसकी भूमिका पर सवाल, कौन हैं वो डॉक्टर संदीप घोष?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 20 Aug 2024 03:00 PM IST

सार

Who is Dr. Sandeep Ghosh: कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी और हत्या की घटना के बाद कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप सवालों के घेरे में हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान भी संदीप घोष को लेकर भी कई सवाल उठाए। इससे पहले हाईकोर्ट भी कहा था कि यह निराशाजनक है कि प्राचार्य सक्रिय नहीं थे।
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आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष - फोटो : AMAR UJALA
कोलकाता में जूनियर महिला के साथ दरिदंगी और हत्या का मामला देश भर में चर्चा में है। यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी पहुंच गया है। मंगलवार को इसकी सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की ध्यक्षता वाली पीठ ने पुलिस जांच से लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष की भूमिका तक पर सवाल उठाए। कोर्ट ने मामले में आठ सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें नौ डॉक्टरों को शामिल किया गया है, जो मेडिकल प्रोफेशनल्स की सुरक्षा, वर्किंग कंडीशन और उनकी बेहतरी के उपायों की सिफारिश करेगा।

इस पूरे मामले में डॉ. संदीप घोष लगातार सवालों के घेरे में है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष सीबीआई के रडार पर हैं। केंद्रीय एजेंसी कई बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा, घोष के खिलाफ आर्थिक धांधली के भी आरोप लगे हैं जिसकी जांच के लिए बंगाल सरकार ने विशेष जांच समिति (एसआइटी) गठित की है। 


आइये जानते हैं कि संदीप घोष कौन हैं? आरजी कर मेडिकल कॉलेज में घटना के बाद उन पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं? सीबीआई उनसे क्यों पूछताछ कर रही है? संदीप पर आर्थिक धांधली के आरोप क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष पर क्या कहा?
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आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष - फोटो : AMAR UJALA
कोलकाता में जूनियर महिला के साथ दरिदंगी और हत्या का मामला देश भर में चर्चा में है। यह मामला उच्चतम न्यायालय में भी पहुंच गया है। मंगलवार को इसकी सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की ध्यक्षता वाली पीठ ने पुलिस जांच से लेकर आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष की भूमिका तक पर सवाल उठाए। कोर्ट ने मामले में आठ सदस्यीय टास्क फोर्स का गठन किया है। इसमें नौ डॉक्टरों को शामिल किया गया है, जो मेडिकल प्रोफेशनल्स की सुरक्षा, वर्किंग कंडीशन और उनकी बेहतरी के उपायों की सिफारिश करेगा।

इस पूरे मामले में डॉ. संदीप घोष लगातार सवालों के घेरे में है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष सीबीआई के रडार पर हैं। केंद्रीय एजेंसी कई बार उनसे पूछताछ कर चुकी है। इसके अलावा, घोष के खिलाफ आर्थिक धांधली के भी आरोप लगे हैं जिसकी जांच के लिए बंगाल सरकार ने विशेष जांच समिति (एसआइटी) गठित की है। 

आइये जानते हैं कि संदीप घोष कौन हैं? आरजी कर मेडिकल कॉलेज में घटना के बाद उन पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं? सीबीआई उनसे क्यों पूछताछ कर रही है? संदीप पर आर्थिक धांधली के आरोप क्या हैं? सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष पर क्या कहा?

आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष - फोटो : AMAR UJALA
सबसे पहले जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट ने संदीप घोष पर क्या कहा
आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में 31 वर्षीय रेजिडेंट डॉक्टर के दुष्कर्म और हत्या के मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार (20 अगस्त) को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य संदीप घोष को लेकर भी कई सवाल उठाए। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सवाल उठाया कि प्रिंसिपल ने इसे आत्महत्या का मामला कैसे बताने की कोशिश की। सीजेआई ने कहा कि सुबह-सुबह अपराध का पता चलने के बाद प्रिंसिपल ने इसे आत्महत्या का मामला बताने की कोशिश की और माता-पिता को शव देखने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जवाब में कहा कि यह सही नहीं है।



सीजेआई ने नियुक्ति को लेकर भी बंगाल सरकार से सवाल दागे। सीजेआई ने कहा कि  जब प्रिंसिपल के आचरण की जांच हो रही है तो प्रिंसिपल को तुरंत दूसरे कॉलेज का प्रिंसिपल कैसे नियुक्त कर दिया गया। सीजेआई ने यह भी पूछा कि क्या प्रिंसिपल छुट्टी पर हैं या निलंबित हैं? इस पर सिब्बल ने कहा कि एसआईटी भी गठित की गई है और वह हाई कोर्ट के निर्देशानुसार छुट्टी पर हैं।

कोलकाता मामले पर सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
अब जानिए कोलकाता के अस्पताल की घटना क्या है
आरजी कर मेडिकल कॉलेज-अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के साथ दरिंदगी की घटना 8-9 अगस्त की दरमियानी रात की है। मृतक मेडिकल कॉलेज में चेस्ट मेडिसिन विभाग की स्नातकोत्तर द्वितीय वर्ष की छात्रा और प्रशिक्षु डॉक्टर थीं। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जूनियर डॉक्टर 8 अगस्त को अस्पताल में रात की ड्यूटी कर रही थीं। रात 12 बजे के बाद उन्होंने दोस्तों के साथ डिनर भी किया। इसके बाद से महिला डॉक्टर का कोई पता नहीं चला। 

9 अगस्त की सुबह उस वक्त मेडिकल कॉलेज में हड़कंप मच गया जब चौथी मंजिल के सेमिनार हॉल से अर्ध नग्न अवस्था में डॉक्टर का शव बरामद हुआ। घटनास्थल से मृतक का मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किया गया। 10 अगस्त की सुबह महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के आरोप में संजय रॉय नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी ब्लूटूथ हेडफोन के टूटे तार से पकड़ा गया था जो पुलिस को सेमिनार कक्ष में गिरा मिला था। 

कोलकाता के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल का केस - फोटो : AMAR UJALA
घटना के बाद क्या हुआ?
महिला डॉक्टर से साथ हुई हैवानियत के बाद पहले कोलकाता, फिर बंगाल और देश भर में प्रदर्शन शुरू हो गए। फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (FORDA) ने देशव्यापी हड़ताल का एलान कर दिया। उधर कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष की निष्क्रियता पर भी सवाल खड़े होने लगे। बढ़ते दबाव के बीच घोष ने 12 अगस्त को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

इसके बाद पत्रकारों से बात करते हुए डॉ. घोष ने दावा किया कि इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें बदनाम किया जा रहा है। डॉ. घोष ने कहा, 'सोशल मीडिया पर मेरी बदनामी हो रही है। यह ठीक नहीं है। मृतक डॉक्टर मेरी बेटी की तरह थी। एक अभिभावक के तौर पर मैं इस्तीफा दे रहा हूं। मैं नहीं चाहता कि भविष्य में किसी के साथ ऐसा हो।'

कोलकाता के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल का केस - फोटो : AMAR UJALA
आखिर कौन हैं संदीप घोष?
डॉ संदीप घोष एक आर्थोपेडिक सर्जन हैं। डॉक्टर हत्याकांड से पहले वह आरजी कर मेडिकल कॉलेज के आर्थोपेडिक्स विभाग में प्रोफेसर और प्रिंसिपल के पद पर थे। डॉ. घोष का जन्म और पालन-पोषण पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव में हुआ था। वे खुद आरजी कर मेडिकल कॉलेज के छात्र रहे हैं। 1989 में बनगांव हाई स्कूल से अपनी उच्चतर माध्यमिक शिक्षा पूरी करने के बाद घोष ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में दाखिला लिया। उन्होंने 1994 में यहां से अपनी मेडिकल डिग्री हासिल की। 

घोष ने पश्चिम बंगाल मेडिकल शिक्षा सेवा पास की थी। उन्होंने चार साल तक कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (सीएनएमसीएच) में बतौर चिकित्सा अधीक्षक और उप-प्राचार्य जिम्मेदारी निभाई। 

कोलकाता के मेडिकल कॉलेज-अस्पताल का केस - फोटो : AMAR UJALA
2021 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल के प्रिंसिपल बने
डॉ. घोष को 2021 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल के प्रिंसिपल पद पर नियुक्त कर दिया गया। इसके तुरंत बाद, कॉलेज के सैकड़ों मेडिकल छात्रों ने छात्रों और छात्रावासों के लिए क्रमशः दो अलग-अलग परिषदों की मांग को लेकर उनके कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल शुरू कर दी। 

2023 में डॉ. घोष को दो बार कॉलेज के प्रिंसिपल के पद से हटाया गया। मई 2023 में जारी किए गए तबादले के आदेश को एक दिन के भीतर ही वापस ले लिया गया और घोष प्रिंसिपल बने रहे। कुछ महीनों बाद सितंबर 2023 में डॉ. घोष को एक बार फिर मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, संदीप घोष के स्थानांतरण के एक महीने के भीतर ही उन्हें फिर से आरजी कर मेडिकल कॉलेज-हॉस्पिटल के प्रिंसिपल के पद पर बहाल कर दिया गया। 

पूर्व सहयोगी ने घोष पर लगाए गंभीर आरोप 
आरजी कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व उपाधीक्षक डॉ. अख्तर अली ने अपने पूर्व सहयोगी डॉ. घोष पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉ. अली ने ने दावा किया कि उन्होंने पूर्व प्राचार्य के खिलाफ जुलाई 2023 को सतर्कता आयोग के भ्रष्टाचार निरोधक विभाग और स्वास्थ्य भवन में शिकायत दर्ज कराई थी। अली ने कहा कि उस शिकायत के बाद घोष का तबादला हो गया, लेकिन कुछ ही समय में उसे रद्द कर दिया गया।

पूर्व उप अधीक्षक ने आरोप लगाया, 'डॉ. घोष जानबूझकर छात्रों को फेल करते थे, टेंडरों पर 20% कमीशन लेते थे, छात्रावास आवंटन, कर्मचारी चयन आयोग के लिए पैसे लेते थे, मूल रूप से आरजी कर में होने वाले किसी भी काम जैसे पोस्टिंग, ट्रांसफर के लिए वह हर चीज के लिए पैसे लेते थे।' 

सीबीआई - फोटो : पीटीआई
अब क्यों विवादों में फंसे संदीप घोष?
8-9 अगस्त की दरमियानी रात को घटी मानवता को शर्मसार कर देने वाली इस घटना के बाद सबसे पहला सवाल अस्पताल प्रशासन पर था। दरिंदगी की शिकार हुई डॉक्टर के परिवार के सदस्यों ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रमुख डॉ. संदीप घोष समेत अस्पताल प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाए। 

13 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने जघन्य हत्याकांड पर सुनवाई की। इस दौरान अदालत ने मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रमुख डॉ. संदीप घोष को लेकर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने कहा कि यह निराशाजनक है कि प्राचार्य सक्रिय नहीं थे। संस्थान के प्राचार्य या तो खुद या उचित निर्देश जारी करके पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकते थे क्योंकि मौत अस्पताल परिसर के भीतर हुई थी।

अदालत ने कॉलेज के पूर्व प्रमुख से सबसे पहले पूछताछ न होने पर सवाल दागे। कोर्ट ने कहा कि भले ही वह प्रशासनिक पद पर हों, लेकिन उनसे सबसे पहले पूछताछ की जानी चाहिए थी। अदालत ने राज्य सरकार के वकील से यह भी पूछा कि उसके प्रति सुरक्षात्मक रुख क्यों अपनाया जा रहा है। इसके बाद अदालत ने उनके बयान को दर्ज करने और उन्हें वह सब कुछ बताने की अनुमति देने का आदेश दिया जो वह जानते हैं।

घटना के बाद प्राचार्य संदीप घोष ने कॉलेज के प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया था लेकिन बाद में राज्य सरकार ने उन्हें दूसरे सरकारी कॉलेज का प्रिंसिपल नियुक्त कर दिया गया। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने इस पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने वाले प्रिंसिपल को दूसरे सरकारी कॉलेज का प्रिंसिपल नियुक्त किया जाना संदिग्ध है। न्यायालय ने संदीप घोष को आवश्यक अवकाश लेने का निर्देश दिया। इसके साथ ही अदालत ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश सुनाया। 

सीबीआई की रडार पर पूर्व प्रिंसिपल 
अदालत के आदेश के बाद केंद्रीय एजेंसी लगातार इस मामले की जांच में जुटी हुई है। सीबीआई बीते चार दिनों से संदीप घोष से भी पूछताछ की है। हालांकि, अभी कई सवाल हैं जिनके जवाब डॉ. घोष नहीं दे पाए हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि संदीप घोष ने एक हफ्ते पहले ही कॉल डिटेल डिलीट कर दी थी जिसे सीबीआई रिकवर कर रही है। 

चिकित्सा संघों के निशाने पर घोष 
घटना के बाद पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष की मुश्किलें लगातार बढ़ने लगीं। 16 अगस्त को पश्चिम बंगाल ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन (WBOA) ने डॉ. घोष को घटना में चल रही जांच में शामिल होने के लिए एक नोटिस जारी किया। पत्र में कहा गया था, 'जब तक आप निर्दोष नहीं हो जाते और न्यायालय से अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक हम आपको WBOA के बैनर तले हमारी सभी शैक्षणिक गतिविधियों से दूर रखने के लिए मजबूर हैं।'

इसके बाद चिकित्सा क्षेत्र में कदाचार के खिलाफ काम करने वाले संगठन 'पीपुल फॉर बेटर ट्रीटमेंट (पीबीटी)' ने भी 19 अगस्त को पश्चिम बंगाल मेडिकल काउंसिल (डब्ल्यूबीएमसी) को एक शिकायत भेजी। इसमें कहा गया, 'नैतिक पतन के लिए डॉ. संदीप घोष का मेडिकल लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए'।

कोलकाता हत्याकांड के खिलाफ प्रदर्शन - फोटो : PTI
बंगाल सरकार और पुलिस ने भी कसा शिकंजा
राज्य सरकार ने आरजी कर अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष के खिलाफ आर्थिक धांधली के मामलों की जांच के लिए विशेष जांच समिति (एसआइटी) का गठन किया है। इस एसआइटी में राज्य सरकार ने चार आइपीएस अधिकारियों को शामिल किया है, जिसका नेतृत्व आईजीपी डॉक्टर प्रणव कुमार करेंगे। यह समिति अगले एक महीने के अंदर मामले की जांच कर सरकार को रिपोर्ट देगी।

संदीप घोष के खिलाफ कोलकाता पुलिस ने भी एफआईआर दर्ज की है। लालबाजार सूत्रों का कहना है कि घटना के दिन दुष्कर्म की शिकार पीड़िता का नाम एवं पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में पुलिस आगे की जांच कर रही है।
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