महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने मनसुख हिरेन मामले में मंगलवार को पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की गिरफ्तारी की मांग की है। विधानसभा में बहस के दौरान देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि आईपीसी की धारा 201 (सबूत मिटाने) के तहत सचिन वाझे की गिरफ्तारी क्यों नहीं हो रही है।
भाजपा नेता देवेंद्र फडणवीस ने पूछा कि आखिर सचिन वाझे को कौन बचा रहा है। बता दें कि सचिन वाझे मुकेश अंबानी के घर के बाहर मिली संदिग्ध कार मामले की जांच कर रहे थे। देवेंद्र फडणवीस ने उन पर सबूत मिटाने का आरोप लगाया है और उनकी गिरफ्तारी की मांग की है। इससे पहले भी कई बार सचिन वाझे सुर्खियों में रहे हैं। यहां सचिन वाझे के बारे में विस्तार से जानिए...
कौन हैं सचिन वाझे?
सचिन वाझे 1990 बैच के पुलिस अधिकारी हैं और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट हैं। सचिन वाझे 2004 में गिरफ्तार किया गया था और उनके खिलाफ तथ्य छुपाने के संबंध में मामला दर्ज था। 2002 के घाटकोपर बम विस्फोट मामले में ख्वाजा यूनुस को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था।
पुलिस ने बताया था कि जब यूनुस को औरंगाबाद ले जाया जा रहा था, तब वह फरार हो गया था लेकिन सीआईडी ने जांच में कहा गया था कि पुलिस हिरासत में ही ख्वाजा की मौत हो गई थी। 2004 में यूनुस मामले में सचिन वाझे की कथित भूमिका की वजह से उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
शिवसेना में हुए थे शामिल
इसके बाद साल 2008 में सचिन वाझे शिवसेना में शामिल हो गए थे। सचिन वाझे की तकनीकी पर अच्छी पकड़ थी इसलिए साल 2010 में लाल बिहारी नाम की नेटवर्किंग साइट भी शुरू की। सचिन वाझे ने अपने करियर की शुरुआत पुणे से की थी। बता दें कि सचिन वाझे ने शीना बोरा हत्या मामले और डेविड हेडली पर किताब भी लिखी थी।