आम आदमी पार्टी ने मंगलवार को ट्विटर पर टिप्पणी की,"राजग सरकार अपने नागरिकों, युवाओं, सेनाओं और किसानों के खिलाफ खड़ी हो सकती है लेकिन चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के समक्ष गर्दन झुका लेती है। #ChinaSlapsModiBack"
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माना जा रहा था कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर के मसले पर संयुक्त राष्ट्र संघ में चीन से कूटनीतिक शिकस्त खा चुकी भारत सरकार ने पिछले दिनों उइघर नेता डोलकुन ईसा को ई-वीजा देकर चीन को संदेश देने की कोशिश की है।
हालांकि सोमवार को भारत ने डोलकुन ईसा का ई-वीजा रद्द कर दिया। गृह मंत्रालय के अधिकारियों का तर्क है कि नई दिल्ली इंटरपोल के नियमों का सम्मान करती है। ईसा के खिलाफ इंटर पोल, रेड कार्नर नोटिस है। वीजा जारी करते समय सुरक्षा एजेंसी को इसकी जानकारी नहीं थी, लेकिन जब मामला संज्ञान में आया तो वीजा रद्द कर दिया।
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चीन की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता चुनयिंग ने भारत के वीजा देने पर कड़ी आपत्ति जताई थी। चुनयिंग ने कहा था कि डोल्कुन के खिलाफ इंटरपोल रेड कार्नर नोटिस जारी है और चीन की पुलिस के अनुसार वह एक आतंकवादी हैं। उसे कानूनी कठघरे में लाना देशों की जिम्मेदारी है।
सभी देश डोलकुन ईसा को आतंकी नहीं मानते
चीन और ताइवान उइघर नेता डोलकुन ईसा को आतंकवादी मानता है, हालांकि अन्य सभी देश ऐसा नहीं मानते। डोल्कुन ईसा उइघर समुदाय के नेता और मानवाधिकार कर्मी हैं। वे उसी शिनजियांग प्रांत से हैं, जहां उइघर मुस्लिमों की बहुतायत है।
उइघर तुर्किस्तान मूल के मुसलमान हैं और इनकी आबादी एक करोड़ के करीब है। शिनजियांग प्रांत में यह समुदाय अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहा है। चीन ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट से जुड़े लोगों को आतंकवादी मानता है। ईसा डोल्कुन उइघर वर्ल्ड कांग्रेस(यूडब्ल्यूसी) के नेता हैं।
1990 से जर्मनी ने उन्हें शरण दे रखी है और निर्वासित जीवन जी रहे हैं। 1997 से इंटरपोल की रेडकार्नर नोटिस वाली सूची में दर्ज हैं। ईसा पर चीन के शिंजियांग प्रांत में आतंकवाद फैलाने, हिंसा तथा हत्या का षयडंत्र रचने का आरोप है। हालांकि ईसा राजनीतिक लक्ष्यों को पाने के लिए हिंसा का इस्तेमाल करने का विरोध करते हैं।
1997 में फर्जी पासपोर्ट पर यूरोप भाग गए थे ईसा
2009 में शिनजियांग में हुए दंगों में 197 लोगों को मौत हुई थी, उसके बाद से डोलकुन ईसा की मुश्किलें बढ़ गईं। 1997 में वे फर्जी पासपोर्ट पर यूरोप भाग गए थे, उनका कहना था कि उन्हें जान का खतरा था। 2006 में जर्मनी ने उन्हें नागरिकता देदी। हालांकि चीन ने अपने प्रभावों का इस्तेमाल कर डोलकुन ईसा के खिलाफ इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करा दिया। 2003 से ही चीन ने उन्हें अतिवांछित आंतकियों की सूची में पहले नंबर पर रखा हुआ है।
वैसे डोलकुन ईसा जिस शिनजियांग प्रांत से आते हैं, उसे ऐतिहासिक दस्तावेजों में तुर्किस्तान भी कहा जाता रहा है। 19वीं शताब्दी में चीन के क्विंग शासकों ने उस प्रांत पर कब्जा कर लिया और 1884 में इसे शिनजियांग नाम दिया गया। चीन इस इलाके में पत्रकारों को आनेजाने की इजाजत नहीं देता।
डोलकुन ईसा को धर्मशाला में लोकतंत्र पर 30 अप्रैल से एक मई तक आयोजित सम्मेलन में हिस्सा लेना था। इस सम्मेलन में दलाई लामा के शरीक होने की संभावना है और डोल्कुन को टूरिस्ट ई-वीजा जारी किया गया था। इससे पहले 2009 में भी ईसा भारत आना चाहते थे, लेकिन उन्हें चीन के दबाव में वीजा नहीं मिल सका था। वहीं उन्हें उत्तर कोरिया में भी सितंबर 2009 में जाने से रोक दिया गया था। पूछताछ भी हुई थी।
इसा के खिलाफ जारी है रेड कॉर्नर नोटिस।
- फोटो : Getty
मौलाना मसूद अजहर और ईसा की कोई तुलना नहीं है। ईसा भी इस तुलना से आहत हैं। उनका मानना है कि उइघर समुदाय अहिंसात्मक तरीके से अपनी मांग कर रहा है, जबकि मसूद अजहर पाकिस्तान के आतंकी संगठन का प्रमुख है।
उन्होंने भारतीय अधिकारियों द्वारा वीजा रद्द करने को काफी दु:खद बताया । ईसा ने ई-मेल में कहा है कि वह वीजा को लेकर भारत की स्थिति और कठिनाइयों को समझते हैं।
हालांकि उइघर नेता ने कहा कि वह इंटरपोल के रेड कार्नर नोटिस के बाद भी अमेरिका और जापान जैसे लोकतांत्रिक देशों की यात्रा करते रहते हैं। ईसा ने उइघर समुदाय और भारत के रिश्ते को भी रेखांकित किया और कहा कि उइघर के लोग भारत को प्यार करते हैं।