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डब्ल्यूएचओ के आंकड़े गलत : 47 लाख मौतों की गणना का वैज्ञानिक आधार नहीं, विशेषज्ञ बोले- मॉडल सबूत नहीं

Fri, 06 May 2022 03:13 PM IST
सुरेंद्र जोशी एएनआई, नई दिल्ली

सार

एम्स के महामारी विशेषज्ञ डॉ. राय ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मॉडलिंग के आधार पर आंकड़े दिए हैं, इसमें महामारी के मूलभूत सिद्धांतों की अनदेखी की गई है।
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डॉ. संजय राय - फोटो : ANI
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा भारत में कोविड से 47 लाख मौतें होने के दावे को देश के कई विशेषज्ञों ने गलत बताया है।  दिल्ली एम्स के महामारी विशेषज्ञ डॉ. संजय राय ने कहा है कि डब्ल्यूएचओ के आंकड़े मॉडलिंग पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। 

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डॉ. राय ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मॉडलिंग के आधार पर आंकड़े दिए हैं, इसमें महामारी के मूलभूत सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के दौरान अधिकांश अनुमान मॉडलिंग के आधार पर जारी किए गए और वे फेल हो गए। इनका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं था। डब्ल्यूएचओ का अनुमान भी सचाई से परे है। 
एम्स के महामारी विशेषज्ञ डॉ राय ने शुक्रवार को एएनआई से चर्चा में कहा कि भारत सरकार के आंकड़े दूसरे देशों के आंकड़ों से ज्यादा बेहतर हैं। कोरोना के आंकड़े कम दिखाने का आरोप गलत है। 
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डॉ. राय ने कहा कि कई मौतें कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान हुईं और स्वास्थ्य सेवाओं के बंद होने के कारण भी अधिक मौतें हो सकती हैं। कई गंभीर रूप से बीमार मरीज थे, जो अस्पतालों तक नहीं पहुंच सके, लेकिन आप इन मौतों को कोविड-19 से हुई, यह साबित नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि यदि एक गंभीर रूप से बीमार कैंसर रोगी की महामारी के दौरान मृत्यु हो जाती है और वह कोविड-19 से संक्रमित हो जाता है, तो उसे कोविड मौतों की सूची में शामिल किया जाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गुरुवार को बीते दो महामारी वर्षों के दौरान दुनियाभर में हुई मौतों को लेकर एक बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट जारी की है। इसमें भारत में 47.4 लाख से ज्यादा मौतों का अनुमान जताया गया है। यह चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि सरकारी आंकड़ों से करीब 10 गुना ज्यादा है। 

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