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जब शरीफ ने वाजपेयी से कहा कि वे पाकिस्तान में भी चुनाव जीत सकते हैं

Fri, 17 Aug 2018 02:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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1999 में लाहौर की ऐतिहासिक बस यात्रा के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी से हाथ मिलाते तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ। (फाइल फोटो)
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अगर अटल बिहारी वाजपेयी की लोकप्रियता ने उन्हें भारत में 12 बार संसदीय चुनाव जीतने में मदद की तो उनके भाषणों के शब्दों की भावुकता और संदेशों में संजीदगी ने उन्हें पाकिस्तान में भी लोगों का चहेता बनाया। वाजपेयी के 1999 में लाहौर की ऐतिहासिक बस यात्रा के दौरान एक भाषण में शांति के लिए एक मजबूत अपील के बाद, उनसे तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने भी मजाक में ये कहा था कि वाजपेयी जी, अब तो आप पाकिस्तान में भी चुनाव जीत सकते है।

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अटल जी का ऐसा ही करिश्मा था और मुझे उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला था। पाकिस्तान के साथ शांति बनाने के अपने प्रयास के तौर पर अमृतसर से लाहौर तक बस यात्रा में मैं भी उनके साथ था। लाहौर के गर्वनर सदन के लॉन में शरीफ के साथ लाहौर घोषणापत्र पर हस्ताक्षर के बाद उनका भाषण मुझे याद है, जिसमें पाकिस्तान के लोगों के लिए शांति की बहुत भावुक अपील थी। उसे पाकिस्तान टेलीविजन ने भी सीधा प्रसारित किया था। 

जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति था लक्ष्य
पाकिस्तान संग शांति बनाने के अलावा अटल जी का अहम लक्ष्य जम्मू-कश्मीर में सामान्य हालात बनाना था। वर्ष 1998 में सरकार गठन के तुरंत बाद हम मनाली में छुट्टियों पर थे। एक मंथन सत्र में अटल जी ने पाकिस्तान सहित सभी पड़ोसियों से बेहतर संबंध को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताने के साथ जम्मू-कश्मीर मुद्दे को हल करने को अपना लक्ष्य बताया था। उनकी नजर में ये दोनों मुद्दे अंतर-संबंधित थे। इसीलिए उन्होंने कोलंबो सार्क शिखर सम्मेलन से इतर वहां नवाज शरीफ से मिलकर द्विपक्षीय वार्ता की शुरुआत की और संबंधों पर जमी बर्फ को पिघला दिया।

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जम्मू-कश्मीर पर अटल के शब्द आज भी प्रासंगिक

कश्मीर घाटी की पहली यात्रा के दौरान अटल जी ने घोषणा की थी कि हम घाटी में शांति चाहते हैं। आपकी सभी समस्याओं को हम जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की भावनाओं के तहत हल करना चाहते हैं। उनका कश्मीरियत अभिव्यक्ति का उपयोग कश्मीर में आंदोलनरत लोगों के लिए जबरदस्त भावुक अपील जैसा साबित हुआ था। जम्मू-कश्मीर पर वाजपेयी सिद्धांत के रूप में ये सभी शब्द आज भी प्रासंगिक हैं और स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने संबोधन में काशीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत का उपयोग वाजपेयी जी के ही सिद्धांत की झलक देते हैं।

कार्यालय खत्म होने पर भी देर रात तक काम
अटल जी कार्यालय समय खत्म होने के बाद भी देर रात तक काम करते थे। वे अपने रेसकोर्स रोड स्थित निवास पर जाने के बाद अगले दिन के कार्यक्रम को देखते थे और अपने भाषणों में लिखे तथ्यों का खुद निरीक्षण करते थे। कई बार हममें में से किसी एक को बुलाकर उसमें संशोधन कराते थे। वे शायद ही कभी आधी रात से पहले काम से उठे हों।

लखनऊ-चांदनी चौक के चटपटे खाने के थे शौकीन
अटल जी चटपटे खाने और मिठाइयों के बहुत शौकीन थे और लखनऊ की स्पेशल फूड चेन तथा कई बार चांदनी चौक से चटपटे व्यंजन मंगाते थे। उन्हें चाट, पकौड़ी, कचौरी, मिठाइयां खाना बेहद पसंद था। इसके अलावा उन्हें अपने मेहमानों के खाने का ध्यान रखने का भी बेहद शौक था। यहां तक कि खास मेहमानों के लिए वे स्टाफ को खुद बताते थे कि किसके लिए क्या बनाना है और किस आदमी को क्या खाने के लिए देना है।

(लेखक- अशोक कुमार टंडन वर्ष 1998 से 2004 तक वाजपेयी के मीडिया सलाहकार रहे थे)
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