कश्मीर घाटी की पहली यात्रा के दौरान अटल जी ने घोषणा की थी कि हम घाटी में शांति चाहते हैं। आपकी सभी समस्याओं को हम जम्हूरियत, इंसानियत और कश्मीरियत की भावनाओं के तहत हल करना चाहते हैं। उनका कश्मीरियत अभिव्यक्ति का उपयोग कश्मीर में आंदोलनरत लोगों के लिए जबरदस्त भावुक अपील जैसा साबित हुआ था। जम्मू-कश्मीर पर वाजपेयी सिद्धांत के रूप में ये सभी शब्द आज भी प्रासंगिक हैं और स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अपने संबोधन में काशीरियत, जम्हूरियत और इंसानियत का उपयोग वाजपेयी जी के ही सिद्धांत की झलक देते हैं।
कार्यालय खत्म होने पर भी देर रात तक काम
अटल जी कार्यालय समय खत्म होने के बाद भी देर रात तक काम करते थे। वे अपने रेसकोर्स रोड स्थित निवास पर जाने के बाद अगले दिन के कार्यक्रम को देखते थे और अपने भाषणों में लिखे तथ्यों का खुद निरीक्षण करते थे। कई बार हममें में से किसी एक को बुलाकर उसमें संशोधन कराते थे। वे शायद ही कभी आधी रात से पहले काम से उठे हों।
लखनऊ-चांदनी चौक के चटपटे खाने के थे शौकीन
अटल जी चटपटे खाने और मिठाइयों के बहुत शौकीन थे और लखनऊ की स्पेशल फूड चेन तथा कई बार चांदनी चौक से चटपटे व्यंजन मंगाते थे। उन्हें चाट, पकौड़ी, कचौरी, मिठाइयां खाना बेहद पसंद था। इसके अलावा उन्हें अपने मेहमानों के खाने का ध्यान रखने का भी बेहद शौक था। यहां तक कि खास मेहमानों के लिए वे स्टाफ को खुद बताते थे कि किसके लिए क्या बनाना है और किस आदमी को क्या खाने के लिए देना है।
(लेखक- अशोक कुमार टंडन वर्ष 1998 से 2004 तक वाजपेयी के मीडिया सलाहकार रहे थे)