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आम आदमी पार्टी से जुड़े बड़े नेताओं ने कब और क्यों छोड़ी पार्टी

Wed, 22 Aug 2018 06:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आशुतोष, अरविंद केजरीवाल, आशीष खेतान
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आशुतोष के बाद एक और पत्रकार आशीष खेतान ने भी आम आदमी पार्टी (आप) से इस्तीफा दे दिया है। खेतान ने पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को 15 अगस्त को ई-मेल से निजी कारणों का हवाला देते हुए इस्तीफा भेजा है। हालांकि केजरीवाल अभी उन्हें मनाने की कोशिशों में जुटे हैं। 
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आशुतोष ने भी अपने इस्तीफे के पीछे व्यक्तिगत कारणों को वजह बताया था। लेकिन यह इस्तीफे ऐसे समय पर हुए हैं जब इस पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक सवाल यह भी है कि इस पार्टी में बार-बार इस्तीफे क्यों होते हैं? 

आम आदमी पार्टी के ज्यादातर संस्थापक सदस्यों की पृष्ठभूमि गैर-राजनीतिक है। इससे जुड़ने वाले लोग एक्टिविस्ट हैं। आइए जानते हैं कि इस पार्टी से जुड़े बड़े नाम कब और क्यों अलग हुए। 
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आम आदमी पार्टी से बड़े-बड़े नामों के अलग होने की सूची लंबी होती जा रही है। साल 2015 में दिल्ली में सरकार बनाने के बाद कई बड़े नेता पार्टी से अलग हो गए। 

सबसे पहले आप के संस्थापक सदस्य योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और शाजिया इल्मी ने पार्टी से नाता तोड़ा। इसके बाद पार्टी के गंभीर चेहरों में से एक प्रो. आनंद कुमार पार्टी के स्टैंड से असहमत नजर आए और उन्होंने भी पार्टी से दूरी बना ली। इसी तरह पूर्व विधायक विनोद बिन्नी और पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने भी आप से बगावत कर दी। 

शाजिया इल्मी ने आप में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का आरोप लगाते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। शाजिया ने 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी। साल 2014 में वो आप के टिकट पर गाजियाबाद से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं, लेकिन बीजेपी प्रत्याशी वीके सिंह से शिकस्त मिली। लेकिन इसके बाद उन्होंने आप छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया। 

2015 में दिल्ली में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद आम आदमी पार्टी के दो बड़े चेहरों योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी से निकाल दिया गया। दोनों ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र की कमी का मुद्दा उठाया था। काफी आरोप-प्रत्यारोप और सार्वजनिक बयानबाजी के बाद दोनों को पार्टी से बाहर निकाल फेंका गया।

योगेंद्र यादव ने अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी स्वराज अभियान बनाई।

प्रशांत भूषण के पिता और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शांति भूषण ने आप की स्थापना के समय एक करोड़ की राशि चंदे के रूप में दी थी। हालांकि जल्द ही उनका पार्टी से मोहभंग हो गया था और वो आम आदमी पार्टी से अलग हो गए थे। 
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अन्य पार्टियों से अलग साबित हो पाई आप?

aap
आम आदमी पार्टी का जन्म भ्रष्टाचार के खिलाफ चले एक बड़े जनांदोलन के बाद हुआ। जनता ने अन्य राजनीतिक पार्टियों की तुलना में आम में एक विकल्प देखा। आप को जो भी सफलता मिली है, वह परंपरागत राजनीति के खिलाफ जनता के मन में बैठे असंतोष के कारण है।

लेकिन उसके शुरुआती नेताओं में से आधे आज उसके सबसे मुखर विरोधियों की कतार में खड़े हैं। दिल्ली के बाद इनका दूसरा सबसे अच्छा केंद्र पंजाब में था। वहां भी यही हाल है। 

दुर्भाग्य से इस पार्टी का आचरण उसी राजनीति जैसा है जिसके विरोध में यह खड़ी हुई है। 'प्रचार-कामना' इसकी दुश्मन है। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल हैं, जो बीजेपी, कांग्रेस या ऐसे ही दलों में जगह नहीं बना पाए। 

इस पार्टी ने अपने आंतरिक फैसलों के लिए लोकतांत्रिक तौर-तरीकों को विकसित नहीं होने दिया। यहां भी हाई कमान है। यह हाई कमान शैली वही काम करती है, जहां सत्ता की यथेष्ट शक्ति केंद्र के पास हो। दिल्ली में यह कुछ समय के लिए ताकत जरूर बनी, पर भविष्य नजर नहीं आ रहा। 
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