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New laws: क्या है 6 गुना पुलिस रिमांड की सच्चाई, 22 लाख पुलिस कर्मियों को एक्सपर्ट बनाएंगे 12000 मास्टर ट्रेनर

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Tue, 02 Jul 2024 11:02 AM IST

सार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 15 दिनों की पुलिस रिमांड पर कहा, कुछ लोग इसे लेकर ऐसा भ्रम फैला रहे हैं कि नए कानूनों में रिमांड का समय बढ़ गई है। सच यह है कि नए कानूनों के तहत भी रिमांड का समय पहले की तरह 15 दिनों का ही है। इस बारे में भ्रांति फैलाई गई है कि रिमांड का समय बढ़ाया गया है।
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तीन नए आपराधिक कानून। - फोटो : Amar Ujala


कांग्रेस पार्टी के नेता पी चिदंबरम ने कहा, तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किया गया है। यह मौजूदा कानूनों को ध्वस्त करने और उनके स्थान पर बिना पर्याप्त चर्चा व बहस के तीन नए कानून लेकर आने का एक और उदाहरण है। कुछ सुधार भी किए गए हैं। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री ने एक्स पर लिखा, तथाकथित नए कानूनों का 90-99 फीसदी अंश कांट-छांट करने, नकल करने और इधर से उधर चिपकाने का काम है। यह काम मौजूदा तीन कानूनों में कुछ बदलाव करके किया जा सकता था, लेकिन यह व्यर्थ कवायद बना दी गई। देश में आतंकियों से निपटने के लिए एक स्पेशल एक्ट है। यूएपीए के तहत आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई होती है। इसके सेक्शन 15 में टेरेरिस्ट एक्ट को परिभाषित किया गया है। अब वही बात भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 113 में शामिल कर दी गई है। विपक्षी नेताओं ने इसे कॉपी पेस्ट बताया है। उन्होंने यह सवाल खड़ा किया है कि अब इसे बीएनएस के सेक्शन 113 में क्यों शामिल किया गया है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा, ये तीनों नए कानून, कल्याणकारी राज्य से पुलिस राज्य की तरफ जाने का इशारा करते हैं।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 15 दिनों की पुलिस रिमांड पर कहा, कुछ लोग इसे लेकर ऐसा भ्रम फैला रहे हैं कि नए कानूनों में रिमांड का समय बढ़ गई है। सच यह है कि नए कानूनों के तहत भी रिमांड का समय पहले की तरह 15 दिनों का ही है। इस बारे में भ्रांति फैलाई गई है कि रिमांड का समय बढ़ाया गया है। इन कानूनों में 60 दिनों के अंदर कुल 15 दिनों की रिमांड का प्रावधान किया गया है। 15 दिन की रिमांड की लिमिट को नहीं बढ़ाया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, नए कानूनों में 7 साल या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य किया गया है। इससे न्याय जल्दी मिलेगा। दोष-सिद्धि दर को 90 फीसदी तक ले जाने में सहायक होगा। गृह मंत्रालय ने फॉरेन्सिक विजिट को अनिवार्य बनाने में दूरदर्शिता के साथ काम कर 2020 में ही नेशनल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी बना दी थी। इसके लिए ट्रेंड मैनपावर की जरूरत होगी। तीन साल के बाद देश में हर साल 40000 से ज्यादा ट्रेंड मैनपावर हमारी न्यायिक प्रणाली की सेवा में उपलब्ध होगा। हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया है कि 9 राज्यों में फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी के कैंपस खोले जाएंगे और 6 सेंट्रल फॉरेंसिक लैबोरेट्री भी स्थापित की जाएंगी।


केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा, इन कानूनों को अमली जामा पहनाने के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय, हर राज्य के गृह विभाग और न्याय मंत्रालय ने बहुत प्रयास किए हैं। नए कानूनों में आज के समय के हिसाब से धाराएं जोड़ी गई हैं। कई ऐसी धाराएं हटाई भी गई हैं, जिससे देशवासियों को परेशानी थी। नए कानूनों पर लगभग 22.5 लाख पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए 12000 मास्टर ट्रेनर्स तैयार हो चुके हैं। कई इंस्टीट्यूशंस को अधिकृत किया गया है। 23 हजार से अधिक मास्टर ट्रेनर्स का भी प्रशिक्षण हो चुका है। ज्यूडिशरी में 21000 सबऑर्डिनेट ज्यूडिशरी की ट्रेनिंग हो चुकी है, साथ ही 20 हजार पब्लिक प्रॉसिक्यूटर को ट्रेंड किया गया है। देशभर के 99.9 प्रतिशत पुलिस थाने कंप्यूटराइज़्ड हो चुके हैं। ई-रिकॉर्ड जनरेट करने की प्रक्रिया भी 2019 से शुरू हो गई थी। जीरो-एफआईआर, ई-एफआईआर और चार्जशीट सभी डिजिटल होंगे। शाह ने कहा, नए कानूनों में सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने की समयसीमा भी तय की गई है। पूरी तरह लागू होने के बाद तारीख पर तारीख से निजात मिलेगी। किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज होने से सुप्रीम कोर्ट तक 3 साल में न्याय मिल सकेगा।

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