फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स

Mewat: क्या है मेवात इलाके का भूगोल और इतिहास, क्यों होते हैं यहां के मुस्लिमों के हिन्दू नाम, जानें सबकुछ

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Sun, 06 Aug 2023 11:57 AM IST

सार

मौजूदा दौर की बात करें तो मेवात इलाका हरियाणा और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के आधुनिक दक्षिणी भाग के हिस्से को मिलाकर बनता है। प्राचीन काल में, इसकी सीमाएं मोटे तौर पर राजस्थान में भरतपुर में देग, अलवर और धौलपुर, हरियाणा के रेवाड़ी, पलवल और गुड़गांव और उत्तर प्रदेश में मथुरा जिलों के कुछ हिस्सों को भी शामिल किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मेवात - फोटो : AMAR UJALA
हरियाणा के नूंह जिले में 31 जुलाई और एक अगस्त को साम्प्रदायिक हिंसा हुई। हिंसा की घटनाएं मेवात तक ही सीमित नहीं रहीं बल्कि इसके पड़ोसी जिलों पलवल और गुरग्राम तक पहुंच गईं। अलग-अलग घटनाओं में दो पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों की जान चली गई।

मेवात इलाके का इतिहास काफी पुराना है। मुगल काल से लेकर आजादी की लड़ाई तक में इस इलाके की चर्चा रही है। लिहाजा जानना जरूरी है कि आखिर मेवात है क्या? इसका भूगोल क्या है? यहां के जनसांख्यकीय आंकड़े क्या हैं? क्षेत्र का इतिहास क्या है? आइये जानते हैं...
विज्ञापन

मेवात - फोटो : AMAR UJALA
हरियाणा के नूंह जिले में 31 जुलाई और एक अगस्त को साम्प्रदायिक हिंसा हुई। हिंसा की घटनाएं मेवात तक ही सीमित नहीं रहीं बल्कि इसके पड़ोसी जिलों पलवल और गुरग्राम तक पहुंच गईं। अलग-अलग घटनाओं में दो पुलिसकर्मियों समेत छह लोगों की जान चली गई।

मेवात इलाके का इतिहास काफी पुराना है। मुगल काल से लेकर आजादी की लड़ाई तक में इस इलाके की चर्चा रही है। लिहाजा जानना जरूरी है कि आखिर मेवात है क्या? इसका भूगोल क्या है? यहां के जनसांख्यकीय आंकड़े क्या हैं? क्षेत्र का इतिहास क्या है? आइये जानते हैं...

आखिर मेवात है क्या? 
भौगोलिक दृष्टि से मेवात एक पहाड़ी क्षेत्र है, जिसमें प्राचीन मत्स्य-देश और सुरसेन का हिस्सा है। मौजूदा दौर की बात करें तो ये इलाका हरियाणा और उत्तर-पूर्वी राजस्थान के आधुनिक दक्षिणी भाग के हिस्से को मिलाकर बनता है। प्राचीन काल में, इसकी सीमाएं मोटे तौर पर राजस्थान में भरतपुर में देग, अलवर और धौलपुर, हरियाणा के रेवाड़ी, पलवल और गुड़गांव और उत्तर प्रदेश में मथुरा जिलों के कुछ हिस्सों को भी शामिल किया गया है। मेवात में अरावली पर्वतशृंखला के कई पहाड़ियां आती हैं।

अभी चर्चा में आया नूंह हरियाणा के 22 जिलों में से एक है। 2016 से पहले इस जिले को मेवात के नाम से जाना जाता था। मेवात जिला 2005 में अस्तित्व में आया। चार अप्रैल 2005 को गुड़गांव जिले और फरीदाबाद जिले के हाथिन ब्लॉक के क्षेत्रों को लेकर जिले को मेवात जिले के रूप में बनाया गया था। हालांकि, हाथिन उप-मंडल को 2008 में पलवल के नए जिले में स्थानांतरित कर दिया गया था। 2016 में जब गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम किया गया तब उसके पड़ोसी जिले मेवात का नाम भी बदलकर नूंह कर दिया गया। 

फिलहाल नूंह क्षेत्र 1507 वर्ग किमी में फैला हुआ है। नूंह के 443 गांवों और पांच छोटे शहरों में 10.89 लाख लोग रहते हैं यह क्षेत्र हरियाणा के सबसे पिछड़ा क्षेत्र है। जिले में पांच तहसील, एक उप तहसील और पांच ब्लॉक शामिल हैं।

मेवात जिला उत्तर में गुरुग्राम, पूर्व में पलवल और दक्षिण और पश्चिम में राजस्थान के अलवर जिले से घिरा है और इसकी सीमाएं राजस्थान के भरतपुर जिले से भी छूती हैं। मेवात जिले का कुछ क्षेत्र पुनहाना तहसील के बिछोर गांव और नाई गांव के पास उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले से भी छूते हैं। इसके साथ ही जिला देश की राजधानी दिल्ली से भी ज्यादा दूर नहीं है। इसका सबसे दूर बिंदु राष्ट्रीय राजधानी से 145 किलोमीटर दूर है।  

मेवात - फोटो : SOCIAL MEDIA
मेवात में आबादी के आंकड़े क्या हैं?
2011 में मेवात की जनसंख्या 10,89,263 थी, जिसमें पुरुष और महिला क्रमशः 5,71,162 और 5,18,101 थे। 2001 की जनगणना के अनुसार, मेवात की जनसंख्या 7,89,750 थी, जिसमें पुरुष 4,15,947 और शेष 3,73,803 महिलाएं थीं। 

2011 में जिले का जनसंख्या घनत्व 729 निवासी प्रति वर्ग किलोमीटर था। 2001-2011 के दशक में इसकी जनसंख्या वृद्धि दर 37.94 फीसदी थी। यहां प्रति 1000 पुरुषों पर 906 महिलाओं का लिंगानुपात है और साक्षरता दर 56.1 प्रतिशत है। मेवात में साक्षरता दर बेहद कम है, खासकर महिलाओं के मामले में। मेवात में मुस्लिम महिलाओं के लिए साक्षरता दर महज 1.76% से 2.13% के बीच है जो देश में सबसे कम है। 

इलाके में सामाजिक वर्गीकरण की बात करें तो यहां सबसे ज्यादा मेव मुस्लिम रहते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जिले में मुसलमान आबादी 8,62,647 (79.20) है। इसके बाद इसके बाद हिंदू 2,21,846 (20.37%), जैन 1,453 (0.13%), ईसाई 11,35 (0.11%), सिख 592 (0.05%) और बौद्ध 516 (0.05%) हैं।

मेवात - फोटो : SOCIAL MEDIA
मेवात का इतिहास क्या है?
मेवात ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है जो दिल्ली के दक्षिण में स्थित है, इसका नाम इसके निवासियों, मेव से लिया गया है। मेवों की भूमि मेवात की उत्पत्ति इसके आदिवासी निवासियों, मेव आदिवासियों से हुई है। यह क्षेत्र एक विशिष्ट जातीय और सामाजिक-सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में जाना जाता रहा है। 

मेव अपनी जड़ें उत्तरी भारत के शुरुआती आर्य आक्रमण में माने जाते हैं और खुद को क्षत्रिय कहते हैं। उन्होंने आस-पास के क्षेत्रों की अन्य जनजातियों के विपरीत बड़े पैमाने पर अपने सामाजिक और सांस्कृतिक गुणों को संजोए रखा है। 

14वीं शताब्दी ईस्वी में तुगलक वंश के शासनकाल के दौरान, इन लोगों ने इस्लाम धर्म अपना लिया लेकिन आज तक, उन्होंने अपनी सदियों पुरानी विशिष्ट जातीय-सांस्कृतिक पहचान बरकरार रखी है। यही वजह है कि यहां मुस्लिमों का पहनावा तक आम मुस्लिमों से अलग है। इलाके मुस्लिमों के नाम आज भी हिन्दू नामों की तरह होते हैं। हिंसा में मारे गए नीरज खान मुस्लिम परिवार से थे। उनके पिता का नाम चिरंजी लाल और ताऊ का नाम लटूर खान है। यही नहीं उसके भाई का नाम सुनील है। ऐतिहासिक रूप से, यह क्षेत्र बेहद अशांत रहा है और पूरे उत्तर-वैदिक काल में बार-बार आक्रमण और लूटपाट का शिकार रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next