शुरुआत में विशेष पुलिस स्थाना की दो शाखाएं थीं:
- सामान्य अपराध शाखा
- आर्थिक अपराध शाखा
डीएसपीई अधिनियम के तहत सामान्य अपराध शाखा केंद्र सरकार और सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के उन कर्मचारियों की जांच करती थी, जिनके बारे में यह संदेह होता था कि वे रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में लिप्त हैं तथा आर्थिक अपराध शाखा आर्थिक/राजकोषीय नियमों के उल्लंघन के विभिन्न मामलों की जांच करती थी। प्रतिभूति घोटाले से संबंधित मामलों और आर्थिक अपराधों में वृद्धि होने के कारण कार्य की अधिकता और भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण की वह से 1994 में अलग से एक अपराध शाखा स्थापित की गई थी।
परंपरागत अपराधों की जांच कब शुरू हुई?
एक भ्रष्टाचार निरोधी जांच एजेंसी के रूप में काम शुरू करने वाली सीबीआई को समय बीतने के साथ-साथ सरकार और न्यायपालिका के विभिन्न क्षेत्रों से पारंपरिक अपराध व अन्य विशिष्ट मामलों की जांच के अनुरोध मिलने शुरू हो गए थे। 1980 के दशक की शुरुआत से संवैधानिक न्यायालयों ने भी खोजबीन और जांच के लिए सीबीआई को मामले भेजने शुरू कर दिए थे।
सीबीआई का अधिकार क्षेत्र
डीएसपीई अधिनियम 1946 की धारा 2 के तहत केवल केंद्रशासित प्रदेशों में अपराधों की जांच के लिए सीबीआई को शक्ति प्राप्त है। हालांकि, केंद्र द्वारा रेलवे तथा राज्यों जैसे अन्य क्षेत्रों में उनके अनुरोध पर इसके अधिकार क्षेत्र को बढ़ाया जा सकता है। वैसे सीबीआई केवल केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित मामलों की जांच के लिए अधिकृत है। कोई भी व्यक्ति केंद्र सरकार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और राष्ट्रीयकृत बैंकों में भ्रष्टाचार के मामले की शिकायत सीबीआई से कर सकता है। इसके अलावा, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामलों में सीबीआई स्वयं कार्रवाई कर सकती है।