हम मुक्त नहीं युक्त की बात करते हैं
भागवत ने कहा हमलोग तो सर्वलोक युक्त भारत वाले लोग हैं, मुक्त वाले नहीं। कांग्रेस के नेतृत्व में देश में एक बड़ा आंदोलन शुरू किया गया। ऐसी कई महान विभूतियां रहीं जिन्होंने अपने जीवन का उत्सर्ग किया और जो हमें आज भी प्रेरणा देती हैं। कांग्रेस ने बड़ा योगदान दिया।
नागपुर से सरकार नहीं चलती है
उन्होंने कहा कि अक्सर सरकार कोई निर्णय लेती है तो कहा जाता है कि नागपुर यानी आरएसएस के मुख्यालय से फोन आया है। यह एक आधारहीन बात है। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग राजनीति में हैं और जो सरकार चला रहे हैं वह हमसे कहीं अधिक अनुभवी हैं। न भाजपा को हमारी सलाह की जरूरत है और न हम उन्हें देते हैं। अगर उन्हें कभी हमारी सलाह की जरूरत होती है या फिर हमें कुछ बताना होता है तब हम एक दूसरे से बात करते हैं।
गोलवलकर के सभी भाषणों का स्वागत नहीं करते
ऐसा माना जाता है कि संघ अपने पूर्व प्रमुख गोलवलकर के मुस्लिमों के खिलाफ भाषणों का समर्थन करता है। भागवत ने कहा कि 'बंच ऑफ थॉट्स' (गोवलकर आरएसएस के दूसरे संघचालक) एक खास संदर्भ में दिए गए भाषणों का संग्रह है। यह हमेशा के लिए वैध नहीं कहा जा सकता। संघ कट्टर नहीं है। समय बदलता है और उसके मुताबिक हमारे विचारों में परिवर्तन आता है।
संघ संविधान बदलना चाहता है ऐसी मान्यता है
लेकिन भागवत इसे सिरे से खारिज करते हैं। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि संविधान सभी भारतीयों की आम सहमति का परिणाम है और हम सभी का कर्तव्य है कि इसका पालन करें। मैंने जो कहा वह संविधान से जुड़ी बात है। संघ संविधान की सर्वोच्चता को मानता रहा है और हम इसका पूरा सम्मान करते हैं।