क्या हो सकता है कानून का उल्लंघन करने पर
किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा महामारी कानून का उल्लंघन किये जाने पर जिलाधिकारी लिखित नोटिस जारी कर उस व्यक्ति या संस्था से सवाल कर सकता है। निश्चित समय सीमा में जवाब न मिलने पर, या संस्था के जवाब से कमेटी के संतुष्ट न होने पर ऐसे व्यक्तियों/संस्थाओं को भारतीय दंड संहिता (Indian Penal Code) के सेक्शन 188 के अंतर्गत दंडित भी किया जा सकता है।
दिल्ली सरकार ने 27 मई 2021 को एक आदेश के जरिये म्यूकरमाइकोसिस (Mucormycosis) या ब्लैक फंगस (Black Fungus) को महामारी घोषित कर दिया। इसके पहले कोरोना को भी केंद्र सरकार द्वारा महामारी घोषित किया जा चुका है। पूर्व में चेचक, प्लेग जैसी बीमारियों को महामारी घोषित किया जा चुका है। राष्ट्रीय स्तर पर किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद केंद्र सरकार को विशेष अधिकार प्राप्त हो जाते हैं। वह इन बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए अपने विवेक से कुछ कुछ ऐसे विशेष कदम भी उठा सकती है जिसे सामान्य स्थिति में वह नहीं उठा सकती है। आवागमन पर प्रतिबंध लगाना, किसी बाज़ार, फैक्ट्री के खोलने पर प्रतिबंध लगाना ऐसे ही कदम हैं। वह किसी क्षेत्र में कुछ समय के लिए चुनाव रद्द कराने संबंधी निर्णय भी ले सकती है। प्राइवेट सेवाओं में भी आवश्यक वस्तुओं, दवाइयों का अधिकतम मूल्य निर्धारित किया जा सकता है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य अधिकारी
दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय के एक शीर्ष अधिकारी के अनुसार सामान्य तौर पर किसी भी व्यक्ति का इलाज करते समय डॉक्टर अपने स्तर पर निर्णय करता है। लेकिन किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद उस बीमारी के इलाज में वह केंद्र या राज्य सरकार द्वारा जारी दवाइयों, तरीकों का ही इस्तेमाल करता है। किसी बीमारी के महामारी घोषित होने के बाद ज्यादातर मामलों में राज्य सरकारें इलाज मुफ्त कर देती हैं। इससे जनता पर इलाज का खर्च नहीं आता। सरकार इसे रोकने के लिए विशेष अभियान चलाती है जिससे अन्य लोगों को इस संक्रामक बीमारी की चपेट में आने से बचाया जा सके। सरकारें जनता के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा भी करती हैं।
ब्लैक फंगस महामारी के लिए बनी कमेटी
दिल्ली सरकार ने लोकनायक अस्पताल में ईएनटी विशेषज्ञ डॉक्टर पीके राठौर के नेतृत्व में नौ सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो राजधानी में ब्लैक फंगस के मामलों पर सभी विशेष निर्णय ले रही है। इसके आलावा जीटीबी और राजीव गांधी अस्पताल में ब्लैक फंगस के रोगियों का इलाज हो रहा है। प्राइवेट अस्पतालों में भी ब्लैक फंगस के मामले देखे जा रहे हैं।
एम्फोटेरिसिन-बी के सही उपयोग और उचित वितरण के लिए सरकार ने डॉक्टर एमके डागा ने नेतृत्व में एक कमेटी बना रखी है। यह कमेटी एम्फोटेरीसिन-बी की मांग पर यह इंजेक्शन अस्पतालों को पहुंचाने के लिए निर्देश देती है। यह इंजेक्शन इस समय खुले बाज़ार में उपलब्ध नहीं है।