हालांकि केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि इन पावरफुल टूल्स का इस्तेमाल आतंकी घटनाओं को रोकने, ऐसे मामलों में धन पोषण और उनके मददगारों का पता लगाने के लिए किया जाएगा। दिसंबर 2020 में वकील प्रशांत भूषण की एक जनहित याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर कहा था कि वह नेटग्रिड, सीएमएस और नेत्रा द्वारा सूचनाएं एकत्रित करना बंद करे। प्रशांत भूषण का कहना था कि इन तीनों टूल्स की मदद से भारतीय नागरिकों पर 360 डिग्री सर्विलांस हो सकती है। ये टूल्स केंद्र एवं राज्यों की लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को निजता में सेंध लगाने का रास्ता बता देते हैं। इससे लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो सकता है।
नेटग्रिड की मदद से रियल टाइम डाटा हासिल हो जाता है, जबकि सीएमएस सेंट्रलाइज्ड तरीके से फोन इंटरसेप्ट करने में मदद करता है। खास बात ये है कि सीएमएस द्वारा जब कोई फोन टेप किया जाता है तो उसके लिए सर्विस प्रोवाइडर को नहीं बताना पड़ता। उसकी इजाजत लेने की भी जरुरत नहीं है। एजेंसियां सीधे ही फोन कॉल, एसएमएस और सोशल मीडिया पोस्ट का पता लगा लेती हैं। नेत्रा के जरिए किसी भी व्यक्ति की ऑनलाइन नेटवर्किंग मालूम हो सकती है। इसका मतलब है कि कोई व्यक्ति ऑनलाइन तरीके से खरीददारी कर रहा है और मोबाइल या लैपटॉप पर कुछ देख रहा है तो एजेंसियां वह जानकारी निकाल सकती हैं।
केंद्र सरकार ने नेटग्रिड में कई अहम बदलाव करने के लिए शॉर्ट टर्म और प्रतिनियुक्ति पर एक्सपर्ट की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। यही वजह है कि नियुक्ति के लिए तय आयु सीमा 56 साल रखी गई है। नई टीम में एक निदेशक, दो डिप्टी सेक्रेटरी, 14 डायरेक्टर और 13 अतिरिक्त निदेशक शामिल रहेंगे। इस टीम को आंतरिक सुरक्षा और प्राइवेसी टॉस्क पर लगाया है। इसमें यह ध्यान रखा जाएगा कि लोगों की निजता भंग न हो। इन एजेंसियों के पास जब ढेर में सूचनाएं आती हैं तो उसमें से कोई विशेष जानकारी कितनी देर में निकाली जा सकती है, वह जानकारी निकालने का शुरुआती एक्सेस किसके पास रहेगा, आदि रणनीतिक कार्य भी निदेशक की टीम को सौंपे गए हैं। एल्गोरिदम डिजाइन और मॉडलिंग के लिए डिप्टी सेक्रेटरी को जिम्मेदारी दी गई है।
यहां लगी टीम यह देखेगी कि किसी आपदा की स्थिति में कितनी जल्दी मौके पर पहुंचा जा सकता है। अगर किसी आतंकी या बड़े अपराधी का फोन टेप हुआ है और उसमें कोई बड़ा एक्शन सामने आता है तो उसे तय समय के भीतर खत्म कर दिया जाएगा। इस तरह के ऑपरेशन की रणनीति पर काम किया जा रहा है। वन-स्टॉप डेस्टिनेशन की प्रणाली लागू कर दी गई है। इसके माध्यम से सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों से डाटाबेस/सूचनाओं को एकत्र कर उन पर कार्रवाई की जा रही है। इसकी मदद से धन शोधन के कई मामले निपटाए गए हैं।
नेटग्रिड के साथ 'अपराध और आपराधिक ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम पहले ही जोड़ा जा चुका है। इसकी मदद से नेटग्रिड की टीम के पास संदिग्ध व्यक्ति का विवरण पहुंच जाता है। यह संदिग्ध आतंकवादियों को ट्रैक करने और आतंकवादी हमलों को रोकने में खुफिया एवं प्रवर्तन एजेंसियों की मदद करता है। नेटग्रिड के पास जो भी सूचना होती है, उसे सीबीआई, राजस्व खुफिया निदेशालय, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड, मंत्रिमंडल सचिवालय, खुफिया ब्यूरो (आईबी), जीएसटी खुफिया महानिदेशालय, मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो, वित्तीय खुफिया इकाई और राष्ट्रीय जांच एजेंसी कानूनी प्रक्रिया के तहत वास्तविक समय पर हासिल करने के लिए अधिकृत हैं।