बंगाल पुलिस और मानवाधिकार आयोग की टीम के बीच हुई नोकझोंक।
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पश्चिम बंगाल में पिछले दिनों रामनवमी के अवसर पर जुलूस निकालने के दौरान हावड़ा और हुगली में हुई हिंसा की जांच करने पहुंची मानवाधिकार संगठन की फैक्ट फाइंडिंग टीम को यहां पुलिस ने घटनास्थल पर जाने से रोक दिया। इस कारण टीम की पुलिस से नोकझोंक हुई। उल्लेखनीय है कि शनिवार को पुलिस ने टीम को रिसड़ा जाने से रोक दिया था।
जानकारी के मुताबिक, रविवार को पुलिस अधिकारियों ने टीम को हावड़ा के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने से रोक दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इलाके में धारा 144 लागू है। इस कारण वे इलाके में नहीं जा सकते हैं। रविवार को टीम के सदस्य हावड़ा के हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में जाकर वहां पर पीड़ित परिवारों के सदस्यों से मिलना चाहते थे।
इस बारे में पुलिस का कहना है कि क्षेत्र में धारा 144 लागू है और टीम के छह प्रतिनिधि को वहां जाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। टीम के सदस्यों ने पुलिस से बात करने की कोशिश की लेकिन पुलिस फैसले पर अड़ी रही। इस कारण टीम के सदस्यों की पुलिस के साथ नोकझोंक हुई।
फैक्ट फाइंडिंग टीम के एक सदस्य ने कहा, पुलिस ने कल हमें एक पत्र भेजा. मामला में हाईकोर्ट में विचाराधीन है। टीम का कहना था कि वे कोई जांच करने नहीं बल्कि लोगों से बातचीत करके उनका हौसला बढ़ाने के मकसद से इलाके में जाना चाहते हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले टीम को रिसड़ा जाने से भी पुलिस ने रोक दिया था।
बता दें कि ‘मानवाधिकारों के उल्लंघन की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी’ के सदस्य हावड़ा-रिसड़ा हिंसा की जांच के लिए दिल्ली से बंगाल आई हुई है। टीम के सदस्यों ने शनिवार को एसएसकेएम अस्पताल जाकर अस्पताल में भर्ती घायलों से मुलाकात की थी।