कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की याचिका खारिज कर दी। सुवेंदु अधिकारी ने अपनी याचिका में आगामी पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। खास बात ये है कि हाईकोर्ट ने भी सुवेंदु अधिकारी के आरोपों में दम की बात मानी है, लेकिन कोर्ट ने इस मामले को राज्य चुनाव आयोग पर छोड़ दिया है। पश्चिम बंगाल में इस साल के मध्य में पंचायत चुनाव होने हैं।
हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग पर छोड़ा मामला
कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस आर भारद्वाज की पीठ ने भाजपा नेता की याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस चरण में पंचायत चुनाव में कोई भी दखलअंदाजी करने से चुनावों में देरी हो सकती हैं। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता विपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में पीआईएल दाखिल की थी।
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बता दें कि पीआईएल में सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने अपने हिसाब से पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण किया है। जिसका टीएमसी को चुनाव में फायदा मिलेगा। सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि टीएमसी ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी का सही डाटा प्रकाशित नहीं किया है। ओबीसी के मामले में भी टीएमसी पर ऐसे ही आरोप लगे थे। अधिकारी ने आरोप लगाया कि टीएमसी आंकड़ों में हेर-फेर कर पंचायत चुनाव में फायदा लेने की कोशिश कर रही है।
पश्चिम बंगाल में इस साल के मध्य में पंचायत चुनाव होने हैं। कुल 31836 पंचायतों, 6158 पंचायत समीतियों और 822 जिला परिषदों में चुनाव होने हैं। पिछले पंचायत चुनाव में टीएमसी ने करीब 90 प्रतिशत सीटों पर जीत दर्ज की थी। उस दौरान हिंसा भी खूब देखने को मिली थी। यही वजह है कि पंचायत चुनाव को देखते हुए इस बार भी पुलिस अलर्ट है।