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पश्चिम बंगाल: चुनाव बाद हिंसा और दुष्कर्म की जांच सीबीआई को सौंपने से ‘ममताई छवि’ को झटका, भाजपा की नैतिक जीत

Thu, 19 Aug 2021 02:05 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

कलकत्ता हाई कोर्ट से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जबरदस्त झटका लगा है। कोर्ट ने चुनाव नतीजों के बाद दुष्कर्म और हत्या जैसे गंभीर मामलों की जांच सीबीआई को सौंप दी है। इससे कथित पीड़ित परिवार और भारतीय जनता पार्टी को राहत मिली है जिसने ममता बनर्जी सरकार पर प्रायोजित हिंसा करने का आरोप लगाया था। 
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ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा और दुष्कर्म की घटनाओं को  लेकर भारतीय जनता पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं के बीच जमकर  बयानबाजी हुई थी। भाजपा ने जहां तृणमूल कांग्रेस पर यह हिंसा कराने का गंभीर आरोप लगाया था। वहीं टीएमसी ने इन आरोपों का खंडन किया था। अब चुनाव बाद हुई हिंसा को लेकर दायर याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने कहा कि हिंसा सहित अस्वाभाविक मृत्यु, हत्या और दुष्कर्म सहित अन्य मामलों की जांच सीबीआई करेगी। 

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ममता की छवि को धक्का- 
एक बुज़ुर्ग महिला और नाबालिग लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के सदस्यों पर सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया। उन्होंने याचिका में कहा कि पश्चिम बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा का समर्थन करने के कारण तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने उनका सामूहिक दुष्कर्म किया और पुलिस उचित कार्रवाई नहीं कर रही है।

हालांकि, टीएमसी ने इन घटनाओं को मनगढ़ंत बताया। लेकिन जिस तरह एक महिला मुख्यमंत्री की जीत के बाद दूसरी महिलाओं ने इस तरह के गंभीर आरोप लगाए उससे पश्चिचम बंगाल सरकार की दामन पर दाग नजर आए। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो ममता बनर्जी सरकार की किरकिरी हो सकती है। इससे विपक्ष की धुरी और सर्वमान्य नेता बनने की उनकी कवायद को भी झटका लग सकता है। विपक्ष के बीच यह सवाल उठ सकता है कि एक महिला मुख्यमंत्री के शासन में महिलाओं की हिफाजत नहीं हो सकती तो ऐसे में उन्हें विपक्ष का सर्वमान्य नेता कैसे माना जा सकता है?    
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भाजपा को नैतिक जीत मिली
कोर्ट का यह आदेश पश्चिम बंगाल भाजपा इकाई के लिए राहत की बात है। भाजपा इकाई ने हिंसा के लिए सीधे तौर पर सत्ताधारी पार्टी को जिम्मेवार ठहराया था। भाजपा नेता चीख-चीख कर कह रहे थे कि  सत्ताधारी पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से नागरिकों के खिलाफ बदला लेने की यह प्रायोजित हिंसा कराई, क्योंकि उन्होंने भाजपा का समर्थन किया था। हिंसा की घटनाओं के बाद भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दो दिनों के लिए पश्चिम बंगाल का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रतापनगर, बेलियाघाटा, उत्तर 24 परगना और गोपालपुर में प्रभावित पार्टी कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की। 

अगर सीबीआई जांच में कथित पीड़ितों के आरोप सही पाए जाते हैं तो भाजपा इसका सबसे पहले फायदा त्रिपुरा में उठाना चाहेगी। महिलाओं के बीच इसे ममता बनर्जी के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बना सकती है। भाजपा ममता बनर्जी को ऐसे शासक के तौर पेश कर सकती है जिसके शासन में महिलाएं सुरक्षित नहीं है। त्रिपुरा ही वो राज्य है जहां 2023 में विधानसभा होने हैं और यहां तृणमूल कांग्रेस अपने पैर मजबूत करने की कोशिश कर रही है। अभी यहां भाजपा की सरकार है। 

क्या हुआ था चुनाव नतीजों के बाद 
दो मई को विधानसभा परिणामों की घोषणा के बाद, पश्चिम बंगाल के कई शहरों में चुनाव के बाद हिंसा की कई घटनाएं हुईं थी। इसमें कम से 16 लोगों की जान चली गई। भाजपा समर्थित कई महिला कार्यकर्ताओं ने अपने साथ मारपीट और रेप होने का आरोप लगाया था। आरोप यह भी लगे कि भाजपा समर्थित कार्यकर्ताओं की संपत्ति की लूटपाट की गई और उनके घर जला दिए गए। 

मानवाधिकार आयोग ने ममता को माना था दोषी
इस मामले पर हाई कोर्ट के आदेश के बाद मानवाधिकार आयोग ने जांच के लिए एक कमिटी का गठन किया था। जांच कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में ममता बनर्जी सरकार को दोषी माना था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि दुष्कर्म व हत्या जैसे मामलों की जांच सीबीआई से कराई जाए और इन मामलों की सुनवाई बंगाल के बाहर हो। वहीं अन्य मामलों की जांच विशेष जांच दल(एसआईटी) से कराई जानी चाहिए। 

आयोग ने यह आरोप लगाया था कि भारी जनादेश के साथ जीतने वाली टीएमसी आलाकमान ने उस समय आंखें मूंद लीं, जब उसके समर्थक भाजपा कार्यकर्ताओं से भिड़ गए और कथित तौर पर हिंसा को बढ़ावा दिया। दो जुलाई को सौंपी अपनी रिपोर्ट में मानवाधिकार आयोग ने कहा था कि राज्य की स्थिति ऐसी है जहां 'कानून का शासन' के बजाय 'शासक का कानून'  चलता है।  विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा के बाद करीब एक लाख लोगों ने राज्य से पलायन किया। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार को नोटिस भी जारी किया था। 

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