पश्चिम बंगाल सरकार ने देश की सर्वोच्च अदालत से एक याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की है। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है। इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने अल्पसंख्यकों समेत कई जातियों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के दर्जे से हटाने का आदेश दिया गया था। अब तक पश्चिम बंगाल में अल्पसंख्यकों समेत कई जातियों को सार्वजनिक क्षेत्र की नौकरियों और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे शिक्षा संस्थानों में आरक्षण दिया जाता था। पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर शीर्ष अदालत ने कहा है कि मामले की सुनवाई 27 अगस्त को होगी।
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अदालत में पेश हुए कपिल सिब्बल
शीर्ष अदालत में पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल पेश हुए। सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पादरीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ से कहा कि कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की आवश्यकता है। सिब्बल ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के फैसले का असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है, जिन्होंने नीट-यूजी 2024 परीक्षा पास की है। सिब्बल ने अदालत से कहा, ‘हम चाहते हैं कि कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगे। छात्रवृत्ति का मामला लटका हुआ है और हाईकोर्ट के फैसले का असर नीट प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ेगा।’ कपिल सिब्बल ने इसके साथ ही अदालत से अनुरोध किया कि याचिका पर दिन में सुनवाई होनी चाहिए।
अदालत ने कहा- 27 अगस्त को होगी सुनवाई
इस दौरान पश्चिम बंगाल के ओबीसी पैनल का प्रतिनिधित्व करने वाले एक वकील ने कहा कि छात्र मेडिकल कॉलेजों और अन्य संस्थानों में प्रवेश पाने के लिए अपने ओबीसी दर्जे के सत्यापन का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा कि 27 अगस्त, मंगलवार के दिन मामले की सुनवाई होगी।