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बंगाल के सबसे करीबी मुकाबले: कहीं ममता 2000 से कम वोट से हारीं तो कहीं केंद्रीय मंत्री 57 वोट से ही जीते

Mon, 04 May 2026 08:53 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

बंगाल चुनाव 2021 में वह कौन सी सीटें थीं, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था? इस कम अंतर की वजह से कौन से बड़े चेहरे चुनाव में जीत दर्ज करने में सफल हुए थे और कौन से अहम कदम वाले नेताओं को हार मिली थी? आइये जानते हैं...
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बंगाल चुनाव में 2021 के सबसे करीबी मुकाबले। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए 4 मई (सोमवार) को मतगणना का दिन है। एग्जिट पोल के नतीजों के बाद से ही सत्तासीन तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लगातार अपनी-अपनी जीत के दावे कर रही हैं। वहीं, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और कांग्रेस की नजर भी इस चुनाव में अपनी खोई हुई जमीन को वापस हासिल करने पर होगी। बीते साल चुनाव में ऐसी कई सीटें थीं, जहां अगर कुछ सौ या हजार वोट इधर-उधर गिरते तो चुनाव के नतीजे पूरी तरह से अलग हो जाते। बताया जा रहा है कि इस बार सभी पार्टियों ने इन्हीं अहम सीटों पर खास ध्यान दिया है, जहां उनकी जीत-हार का अंतर चंद वोटों से तय हुआ था। 
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आइये जानते हैं बंगाल चुनाव 2021 में वह कौन सी सीटें थीं, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा था? इस कम अंतर की वजह से कौन से बड़े चेहरे चुनाव में जीत दर्ज करने में सफल हुए थे और कौन से अहम कदम वाले नेताओं को हार मिली थी?

पहले जानें- 1000 से कम अंतर पर जीत-हार वाली सीटें?

  • बंगाल में 2021 के चुनाव में 1000 से कम वोटों से जीत-हार का नतीजा तय करने वाली कुल सात सीटें रहीं।
  • इनमें से चार सीटें- दिनहाटा, बलरामपुर, कुलटी और घाटल सीट भाजपा के खाते में गईं, जबकि तीन सीटें- दंतन, तामलुक और जलपाईगुड़ी तृणमूल कांग्रेस के पास आईं। 
  • सबसे करीबी अंतर से जीत भाजपा के नेता और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक को मिली थी। वे दिनहाटा सीट से सिर्फ 57 वोटों से जीते थे। 

अब जानें- 1000 से ज्यादा पर 2000 से कम अंतर से हार-जीत वाली सीटें

बंगाल में ऐसी सीटों की संख्या पांच रही। इन सभी सीटों पर भाजपा को जीत मिली थी। इनमें सबसे चर्चित सीट नंदीग्राम की रही थी, जहां भाजपा की तरफ से लड़ रहे शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को महज 1956 वोटों के अंतर से हरा दिया था। वहीं, पूर्व क्रिकेटर और तेज गेंदबाज अशोक डिंडा की सीट भी चर्चा में रही थी। उन्हें मोयना सीट से महज 1260 वोटों से जीत मिली थी। 

2000 से ज्यादा पर 3000 से कम अंतर पर हार-जीत वाली सीटें

सात सीटों पर हार-जीत का अंतर दो हजार से ज्यादा पर तीन हजार से कम रहा था। इनमें तीन सीटें भाजपा के पास, जबकि चार सीटों पर टीएमसी का कब्जा हुआ। इनमें सबसे चर्चित सीट बनगांव दक्षिण की रही, जहां भाजपा के स्वपन मजूमदार 2004 वोटों से जीते थे। 

3000 से ज्यादा पर 4000 से कम अंतर पर हार-जीत का निर्णय करने वाली सीटें

इन सीटों की संख्या 10 रही। इनमें से छह टीएमसी के पास गईं। वहीं, तीन भाजपा के पास गईं। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। यह सीट दार्जिलिंग जिले में पड़ने वाली कलिमपोंग सीट थी, जहां से रुदेन सदा लेपचा को महज 3870 वोटों से जीत मिली थी।  
 

4000 से 5000 के अंतर से विजेता तय करने वाली सीटों की संख्या

सात सीटों पर जीत-हार का अंतर चार हजार से पांच हजार वोटों के बीच रहा। इस अंतर से जीत दर्ज करने वाले सभी उम्मीदवार भाजपा के थे। इनमें सबसे चर्चित सीट बर्धमान जिले में आने वाली आसनसोल दक्षिण की थी, जहां से भाजपा के उभरती हुई नेता अग्निमित्रा पॉल ने 4487 वोटों से जीत हासिल की।

5000 से 10,000 वोटों के अंतर से जीत-हार तय करने वाली सीटें

बंगाल में कुल 33 सीटों पर जीत-हार का अंतर 5000 से 10,000 वोटों के बीच रहा। इनमें से 24 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस ने जीत हासिल की। वहीं, भाजपा को महज नौ सीटों पर ही जीत मिल पाई। जिन अहम सीटों पर हार-जीत इस अंतर से तय हुईं, उनमें हावड़ा उत्तर से लेकर आरमबाग और कटवा से लेकर बैरकपुर तक की सीटें शामिल रहीं। इन सभी सीटों पर इस बार भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने ताकत झोंकी है। 



 
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