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Bengal: ईडी की कोलकाता में कई ठिकानों पर छापेमारी, राशन घोटाला केस से जुड़े मामले में सक्रिय हुई एजेंसी

Tue, 13 Feb 2024 11:02 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

ईडी की टीम कोलकाता में फिलहाल आधा दर्जन जगहों पर जांच कर रही है।     
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ईडी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल के कोलकाता में प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने सुबह-सुबह कई ठिकानों पर छापेमारी की। बताया गया है ईडी ने यह रेड राशन घोटाला केस से जुड़े धनशोधन के मामले में डाली हैं। ईडी की टीम कोलकाता में फिलहाल आधा दर्जन जगहों पर तलाशी ली।   

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने पश्चिम बंगाल में करोड़ों रुपये के राशन घोटाले की चल रही जांच के सिलसिले में मंगलवार सुबह कोलकाता में कई स्थानों पर छापे मारे। ईडी की टीम ने साल्ट लेक, काइखली, मिर्जा गालिब स्ट्रीट, हावड़ा और कुछ अन्य स्थानों पर छापे मारे।

ईडी के अधिकारी ने बताया, उत्तरी 24 परगना जिले के बनगांव के रहने वाले एक विदेशी मुद्रा व्यापारी सहित तीन लोगों के परिसरों पर छापे की कार्रवाई की गई। अधिकारी ने कहा, राशन घोटाले में धन को विदेश में विभिन्न खातों में भेजा गया। यह विशेष व्यवसायी बनगांव का है और गिरफ्तार टीएमसी नेता शंकर आध्या के साथ उसके अच्छे संबंध हैं।  

 



आखिर है क्या राशन घोटाला?
पश्चिम बंगाल में यह घोटाला राशन वितरण में सामने आया था। जांचकर्ताओं और बंगाल भाजपा नेताओं का दावा है कि यह घोटाला एक हजार करोड़ से कम का नहीं है। इनका यह भी दावा है कि यह घोटाला पिछले एक दशक से अधिक समय से चल रहा है और कोविड के वर्षों के दौरान इसमें तेजी आई है।

दरअसल, केंद्र सरकार द्वारा सूचीबद्ध चावल मिलों और आटा मिलों को खरीदे गए गेहूं को पीसने के लिए भेजा जाता है और इसके बाद प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत उचित मूल्य राशन की दुकानों से लाभार्थियों को बांटा जाता है।

सरकारी वितरक मिल मालिकों से गेहूं उठाते हैं और उन्हें राशन की दुकानों में आपूर्ति करते हैं। प्रत्येक वितरक के पास संचालन का एक निश्चित क्षेत्र होता है और वे कितनी दुकानों पर अनाज वितरित कर सकते हैं इसकी संख्या भी पहले से तय होती है। वितरक मिलों से कितनी मात्रा में अनाज खरीद सकते हैं, यह भी निश्चित होता है और उनकी डिलीवरी रसीदों में इसका जिक्र किया जाता है।

यहीं से शुरू होती है कथित भ्रष्टाचार की कड़ी। आरोप है कि वितरकों ने मिल मालिकों के साथ मिलकर राशन की दुकानों में वितरण के लिए मिलों से निर्धारित मात्रा से कम मात्रा में राशन उठाया। जांच एजेंसियों का दावा है कि इससे राशन वितरण प्रणाली में 20-40 फीसदी तक का घाटा हुआ। इसके बाद बचे हुए अनाज को खुले बाजारों में बाजार दरों पर बेच दिया गया और इससे होने वाली आमदनी को सिंडिकेट के सदस्यों के बीच कमीशन के रूप में बांटा गया।

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इसी मामले में आरोपी है शाहजहां शेख
पांच जनवरी को ईडी अधिकारियों की टीम इसी मामले में छापेमारी के लिए संदेशखाली पहुंची थी। हालांकि, यहां जब उन्होंने संदेशखाली में टीएमसी नेता के आवास में प्रवेश करने की कोशिश की, तब भीड़ ने टीम को घेरकर उस पर हमला कर दिया। इस हमले में एजेंसी के तीन अधिकारी घायल हो गए थे। 24 जनवरी को ईडी ने घोटाले के सिलसिले में तलाशी अभियान के बाद शाहजहां शेख के आवास को सील कर दिया था। 

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