ममता बनर्जी दिल्ली क्या पहुंचने वाली हैं कोलकाता से लेकर अगरतल्ला और अब दिल्ली में सियासी पारा ऊपर चढ़ना तय माना जा रहा है। त्रिपुरा में पश्चिम बंगाल युवा इकाई की अध्यक्ष सयानी घोष की गिरफ्तारी और पार्टी नेताओं पर कथित हिंसा के आरोप के बाद टीएमसी सांसद सोमवार को दिल्ली में धरना देंगे। टीएमसी के सांसदों ने गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात का समय मांगा है। रविवार शाम पार्टी के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने ट्वीट किया: “त्रिपुरा में गुजरात मॉडल। @AITCofficial ऐसी फासीवादी क्रूरता को कभी स्वीकार नहीं करेगा। तृणमूल सांसद दिल्ली रवाना हो गए हैं.....
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संसद के शीतकालीन सत्र से पहले राष्ट्रीय राजधानी के चार दिवसीय दौरे पर सोमवार को दिल्ली पहुंच रही हैं। ममता बनर्जी के दिल्ली आने से पहले उनके सांसदों को भी यहां पहुंचने का निर्देश मिल गया है। ममता का दिल्ली दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब त्रिपुरा में पश्चिम बंगाल युवा इकाई की अध्यक्ष सयानी घोष को शनिवार रात मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब को धमकी देने के आरोप में हत्या के प्रयास की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया है। जहां इस सप्ताह के अंत में निकाय चुनाव होने हैं और टीएमसी और भाजपा दोनों पार्टियों एक-दूसरे पर जमकर प्रहार कर रही हैं। दूसरी तरफ 29 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है, जिसमें सरकार को विपक्ष के कई सवालों से जूझना है।
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इस साल अप्रैल-मई में पश्चिम बंगाल के चुनावों में उनकी पार्टी की शानदार जीत के बाद ममता बनर्जी का राष्ट्रीय राजधानी का यह दूसरा दौरा होगा। जब से टीएमसी ने इस साल बंगाल में बड़ी जीत दर्ज की है, बनर्जी को उनकी पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा विरोधी मोर्चे की अगुआ और प्रधान मंत्री उम्मीदवार के चेहरे के रूप में आगे बढ़ा रही है। ममता ने अपने पिछले दौरे में ही यह साफ कर दिया था कि वे हर दो महीने पर दिल्ली आएंगी। हालांकि जुलाई के बाद वे अब दिल्ली पहुंच रही हैं।
माहौल बना रहीं ममता
राजनीति के जानकार कहते हैं कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को हराने के बाद ममता दिल्ली बार-बार इसलिए आ रही हैं कि वे यह माहौल बनाना चाहती हैं कि विपक्ष का सबसे ताकतवर चेहरा वही हैं। हमने टीएमसी के कुछ सांसदों, पार्टी नेताओं और राजनीतिक जानकारों से बातचीत के आधार पर यह नतीजा निकाला है कि ममता के दिल्ली दौरे में वैसे तो कई मुद्दों पर चर्चा होनी है लेकिन उनके दौरे में पांच महत्वपूर्ण एजेंडा शामिल है।
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संसद भवन
- फोटो : अमर उजाला
1.संसद के शीतकालीन सत्र में सरकार की चौतरफा घेराबंदी
टीएमसी सुप्रीमो विपक्षी नेताओं से मुलाकात कर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को संसद के घेरने की एक संयुक्त रणनीति बना सकती हैं। माना जा रहा है कि तीन कृषि कानूनों को वापिस लिए जाने के पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद संसद का यह शीतकालीन सत्र तूफानी होने वाला है, जिसमें विपक्ष सरकार की चौतरफा घेरेबंदी की तैयारी कर रहा है। ममता उसी घेरे को मजबूत करने के लिए विपक्षी नेताओं से बात करेंगी।
2. विपक्षी एकता को ताकत
सरकार को घेरने और संसद के शीतकालीन सत्र के लिए रणनीति बनाने के तहत ममता बनर्जी विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए पहुंच रही हैं। वे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तीसरी बार जीत के ठीक बाद भाजपा के खिलाफ विपक्षी एकता की वकालत करती रही हैं। ममता का दिल्ली दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पांच राज्यों में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने हैं। जिसमें ममता की पार्टी अगले साल होने वाले गोवा विधानसभा में भी उतर रही है।
सूत्र बताते हैं कि ममता बनर्जी का जोर इस बात पर है कि विपक्ष को अभी मजबूती से सत्तारूढ़ भाजपा के सामने खड़े रहना चाहिए, ताकि संसद और संसद के बाहर (जिन राज्यों में चुनाव होने हैं) वहां विपक्ष के सामने एक मजबूत विकल्प तैयार हो सके। वे प्रमुख विपक्षी दलों के कई नेताओं से मुलाकात कर सकती हैं। बहरहाल, दिल्ली में सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ममता बनर्जी कांग्रेस और टीएमसी के बीच तनातनी के बाद सोनिया गांधी से मिलती हैं या नहीं। हाल के हफ्तों में गोवा, त्रिपुरा, असम और यहां तक कि उत्तर प्रदेश में कई कांग्रेस नेता तृणमूल में शामिल हुए हैं।
एक सांसद ने बताया ‘दीदी’ (ममता बनर्जी) जिन नेताओं से मिलने वाली है उसकी फेहरिस्त लंबी है। उन्होंने कहा 'इस बार वे चौंका सकती हैं'। टीएमसी प्रमुख जब पिछली बार जुलाई में दिल्ली आईं थीं, तो उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, कमलनाथ और आनंद शर्मा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित शीर्ष विपक्षी नेताओं से मुलाकात की थी।
3-पीएम से मुलाकात
ममता बनर्जी की प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से भी मिलने का कार्यक्रम है। बताया जा रहा है कि वे राज्य के कई मुद्दों पर पीएम से चर्चा करना चाहती हैं। जिसमें सबसे अहम राज्य को बकाया राशि का भुगतान और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र के विस्तार का मुद्दा शामिल है। पश्चिम बंगाल विधानसभा ने बीते मंगलवार को बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार करने के केंद्र के फैसले के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित किया था। ऐसा करने वाला वह दूसरा राज्य बन गया है।
इससे पहले पंजाब विधानसभा ने ऐसा ही प्रस्ताव पारित किया है। बीएसएफ अधिनियम में संशोधन के केंद्र के फैसले पर एक विवाद छिड़ गया है, विपक्षी नेताओं ने केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर देश के संघीय ढांचे को कमजोर करने का आरोप लगाया है। पंजाब और पश्चिम बंगाल सरकार ने केंद्र सरकार के इस फैसले का जबरदस्त विरोध किया है। ममता बनर्जी तो इस मुद्दे पर केंद्र सरकार खिलाफ मोर्चा खोल चुकी हैं।
4-वरूण गांधी को पार्टी में शामिल कराने की संभावना
सियासी गलियारे में इस बात की जबरदस्त चर्चा है कि भाजपा सांसद वरुण गांधी टीएमसी में शामिल हो सकते हैं। ‘इस बार वे आपको चौंका सकती हैं’, टीएमसी सांसद की इस बात को जब इस चर्चा से जोड़कर देखते हैं तो यह चौंकाने वाला फैसला साबित हो सकता है। भाजपा सांसद रहे बाबुल सुप्रीयो पहले ही टीएमसी में शामिल हो चुके हैं।
पश्चिम बंगाल में जीत के बाद टीएमसी पार्टी तोड़ो अभियान में लगी हैं। राज्य के कई भाजपा विधायक और नेता चुनाव के बाद टीएमसी में शामिल हो गए हैं। तो दूसरे राज्यों में भी कांग्रेस के कई नेता टीएसी का दामन थाम रहे हैं। यदि वरुण गांधी टीएमसी में शामिल होते हैं तो भाजपा के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। पिछले कुछ समय से वरुण गांधी किसान आंदोलन के खिलाफ लगातार अपना विरोध जता रहे हैं और पार्टी के खिलाफ आक्रमक तेवर अपनाए हुए हैं। वरुण गांधी ने लखीमपुर खीरी हिंसा में किसानों की हत्या की निंदा की थी।
भाजपा से नाराज बताए जाते हैं वरुण
माना जाता है कि वरुण गांधी पार्टी की कुछ नीतियों से नाराज हैं। हाल ही में वरुण और उनकी मां मेनका गांधी को राष्ट्रीय कार्यकारिणी से बाहर कर दिया गया है। माना जाता है कि टीएमसी जो उत्तर प्रदेश में भी अपना पार्टी संगठन मजबूत कर रहीं हैं, उसे पीलीभीत सांसद वरुण गांधी में अपना राजनीतिक भविष्य दिख रहा है। दूसरी तरफ राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अगर वरुण गांधी भाजपा छोड़ेंगे तो उन्हें एक नए राजनीतिक मंच की जरूरत होगी जो कांग्रेस कतई नहीं है। इस बारे में पूछे जाने पर टीएमसी के एक शीर्ष नेता ने बताया ममता बनर्जी का यह दिल्ली दौरा राष्ट्रीय राजनीति के लिए "बहुत महत्वपूर्ण" साबित होगा।
5.पत्रकारों से बातचीत
बताया जा रहा है कि ममता के एजेंडें में राष्ट्रीय मीडिया से मुलाकात भी शामिल है। जहां वे विभिन्न मुद्दों पर मीडिया के सवालों का जवाब देंगी। हालांकि बताया जा रहा है कि मीडिया से उनकी यह बातचीत ऑफ द रिकॉर्ड हो सकती है, जैसा कि पिछले दौरे में हुआ था। ममता दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में अब हिंदी को अहमियत दे रही हैं और पत्रकारों के पूछे गए सवालों के जवाब हिंदी में देना पसंद कर रही हैं। हिंदी भाषा को अहमियत देने के पीछे पैन इंडिया अपनी स्वीकार्यता बढाने की उनकी महत्वकांक्षा मानी जा रही है।