फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

West Bengal: ममता सरकार को बड़ा झटका, हाईकोर्ट ने 'दुआरे राशन' योजना को अवैध घोषित किया

Wed, 28 Sep 2022 04:03 PM IST
प्रांजुल श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

कलकत्ता हाईकोर्ट का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा चलाई जा रही दुआरे राशन योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ है।
विज्ञापन
ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने राज्य सरकार की 'दुआरे राशन' योजना (घर के दरवाजे पर राशन) को अवैध घोषित कर दिया है। कोर्ट का कहना है कि पश्चिम बंगाल सरकार की यह योजना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ है। दरअसल, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2021 में 'दुआरे राशन' योजना शुरू की गई थी, जिसके तहत लाभार्थियों के घर पर राशन सामग्री उपलब्ध कराई जानी थी। इस बीच टीएमसी महासचिव कुणाल घोष ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट जाने पर विचार कर रहे हैं। योजना लोगों के हित के लिए है, लेकिन भाजपा को इससे दिक्कत है।

विज्ञापन


कलकत्ता हाई कोर्ट ने बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार की 'दुआरे राशन योजना' को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के विरुद्ध घोषित करते हुए कहा कि यह कानूनी रूप से शून्य है। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने फैसले को वैध घोषित किया था। इस आदेश को उचित मूल्य की दुकान के डीलरों ने दोबारा हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति चित्तरंजन दास और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध रॉय की खंडपीठ ने कहा कि 'दुआरे राशन योजना' राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के खिलाफ है और इसलिए कानून की नजर में शून्य है।

160 करोड़ रुपये योजना पर होने थे खर्च
ममता सरकार ने इस योजना को लॉन्च करते वक्त कहा था कि इस योजना पर सरकार 160 करोड़ रुपये खर्च करेगी। लोगों तक राशन पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर वाहन खरीदने के लिए लगभग 21,000 राशन डीलर को एक-एक लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करेगी। योजना के जरिए 10 करोड़ लोगों को लाभान्वित करने का सरकार का लक्ष्य था। सरकार का कहना था कि इससे 42 हजार नौकरियां सृजित होंगी। 
विज्ञापन


ममता बनर्जी सरकार द्वारा नवंबर, 2021 में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत लाभार्थियों के दरवाजे पर खाद्यान्न की डिलीवरी के लिए योजना शुरू की गई थी। उचित मूल्य की दुकान के डीलरों की एक याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्ण राव की एकल पीठ ने 16 जून को कहा था कि लाभार्थियों के दरवाजे तक खाद्यान्न पहुंचाने के राज्य सरकार के फैसले को एनएफएस अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता है। एकल पीठ के फैसले को चुनौती देते हुए उचित मूल्य की दुकान के डीलरों ने खंडपीठ का रुख किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें