कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार को सीबीआई को पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में एक अप्रैल को कोल सिंडिकेट के कथित संचालक राजू झा की हत्या की जांच पुलिस से अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया। राजू झा को शक्तिगढ़ में NH-19 पर उनकी एसयूवी के अंदर ने गोली मार दी थी। दो हमलावरों ने वारदात को अंजाम दिया था। न्यायमूर्ति राजशेखर मंथा ने सीबीआई को चार महीने के भीतर मामले की जांच करने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने सीबीआई की उस रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया, जिसमें कहा गया था कि याचिकाकर्ता नरेंद्र खड़का एजेंसी द्वारा जांच किए जा रहे कोयला घोटाले के एक मामले में चार्जशीट किए गए आरोपी हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राजेश कुमार झा उर्फ राजू झा ऐसे किसी भी मामले में आरोपी नहीं थे, जिसकी जांच एजेंसी कर रही है। वह कथित तौर पर 2015 और 2020 के बीच कोयला सिंडिकेट का संचालन कर रहे थे।
अदालत ने सीबीआई की उस रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया, जिसमें कहा गया था कि हमले से बचने वाले व्यक्तियों में से एक अब्दुल लतीफ था, जो मवेशी तस्करी के एक मामले में आरोपी है, जिसकी जांच एजेंसी कर रही है। पश्चिम बंगाल सरकार के वकील ने कोर्ट से कहा कि पुलिस ने जांच में पर्याप्त काम किया है और मामले को बंद करने की ओर बढ़ रही है।
न्यायमूर्ति मंथा ने पाया कि सीबीआई की दलीलों में कुछ अहत तथ्य है। उनमें से एक यह कि एक अप्रैल को शक्तिगढ़ पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई प्राथमिकी कोयला और पशु घोटालों में सीबीआई द्वारा की जा रही मौजूदा जांच से जुड़ी हुई है। बता दें कि राजू झा की हत्या के सिलसिले में उनके एक कर्मचारी को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने और कथित तौर पर हिरासत में प्रताड़ित किए जाने के बाद नरेंद्र खड़का ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।