गौरतलब है कि अदालत ने पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में छह सदस्यीय तथ्य-खोज टीम को 1 मार्च को संदेशखाली जाने की अनुमति दी है। टीम माझेरपारा, नतुनपारा और नस्करपारा जाएगी।
पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी, भाजपा विधायक शंकर घोष के साथ संदेशखाली के लिए रवाना हो गए। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत के वक्त कहा कि लोकतंत्र की जीत हुई है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सुवेंदु अधिकारी को उत्तर 24 परगना के संदेशखाली में जेलियाखलिया और हलदरपारा जाने की अनुमति दे दी है। वहीं पुलिस ने उत्तर 24 परगना के रामपुर में बैरिकेडिंग कर दी है। हालांकि नाव से सुवेंदु अधिकारी संदेखाली के लिए रवाना हो गए हैं।
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सुवेंदु अधिकारी को जबरन रोकने की हो रही कोशिश
इधर, टीएमसी द्वारा हस्ताक्षर सत्यापित करने को लेकर शंकर घोष ने मीडिया को बताया, 'उन्हें इस बारे में कोई सुराग नहीं है कि सुवेंदु अधिकारी को कैसे रोका जाए। इसीलिए, वे किसी तरह की अराजकता पैदा कर रहे हैं। उन्हें रोकने के लिए समय बर्बाद कर रहे हैं। वे उनके हस्ताक्षर को सत्यापित करना चाहते हैं और अब गए हैं।' उनके उच्च अधिकारी आगे प्रगति करेंगे। मुझे आशा है कि वे हमें हमारे गंतव्य तक जाने की अनुमति देंगे।'
गौरतलब है कि अदालत ने पटना हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के नेतृत्व में छह सदस्यीय तथ्य-खोज टीम को 1 मार्च को संदेशखाली जाने की अनुमति दी है। टीम माझेरपारा, नतुनपारा और नस्करपारा जाएगी।
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इसके साथ ही न्यायमूर्ति कौशिक चंद्रा ने राज्य के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को भी संदेशखाली जाने की अनुमति दे दी है। इस दौरान कोई भी भड़काऊ टिप्पणी नहीं की जा सकेगी।
क्या है मामला?
पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में पांच जनवरी को लगभग एक हजार लोगों की भीड़ ने ईडी के अधिकारियों पर उस वक्त हमला कर दिया था, जब वे राज्य में कथित राशन वितरण घोटाले की जांच के सिलसिले में शेख के परिसर पर छापेमारी के लिए गए थे। संदेशखाली में तृणमूल कांग्रेस के कुछ स्थानीय नेताओं पर यौन उत्पीड़न के आरोप भी लगे हैं। उन पर जमीन पर कब्जा करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसे लेकर यहां प्रदर्शन हो रहे हैं।