गौरतलब है कि एक अप्रैल को जिन 30 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है, उन पर 171 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राज्य में भाजपा-टीएमसी आमने-सामने हैं, लेकिन नंदीग्राम सीट दोनों ही राजनीतिक दलों के लिए नाक का सवाल बन चुकी है। इसके अलावा दोनों पार्टियां जातीय और धार्मिक समीकरणों के दांव-पेच चलकर हर जतन कर रही हैं।
बता दें कि दूसरे चरण में बंगाल के चार जिलों की 30 सीटों पर मतदान होना है। इनमें साउथ 24 परगना की चार, पश्चिम मेदिनीपुर की नौ, बांकुरा की आठ और पूर्व मेदिनीपुर की नौ सीटें शामिल हैं। अगर इन 30 सीटों की बात करें तो 2016 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इनमें से 22 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा सिर्फ एक सीट ही अपनी झोली में डाल पाई थी। लेकिन टीएमसी की दिक्कतें लोकसभा चुनाव 2019 से बढ़ीं, क्योंकि तब भाजपा ने इन 30 विधानसभा क्षेत्रों में से 18 पर बढ़त बना ली। वहीं, टीएमसी सिर्फ 12 विधानसभा क्षेत्रों पर ही बढ़त बना सकी। ऐसे में दूसरे चरण का चुनाव काफी रोचक हो गया है।
बंगाल में दूसरे चरण की विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा 24 फीसदी अनसूचित जाति के मतदाता हैं, जबकि यहां मुस्लिम आबादी करीब 13 फीसदी है। इसके अलावा पांच फीसदी अनुसूचित जनजाति के मतदाता हैं। हालांकि, नंदीग्राम सीट पर हालात एकदम अलग हैं। यहां मुस्लिम आबादी करीब 35 फीसदी है, जो नंदीग्राम सीट पर हार-जीत तय कर सकती है।
गौर करने वाली बात है कि टीएमसी ने इन 30 सीटों में से 17 पर उम्मीदवारों को बदल दिया। बता दें कि टीएमसी ने लोकसभा चुनाव 2019 में साउथ 24 परगना जिले की सभी सीटों पर बढ़त बनाई थी। ऐसे में पार्टी ने इन सीटों पर एक भी उम्मीदवार नहीं बदला और 2016 के सभी उम्मीदवारों को बरकरार रखा। वहीं, पूर्व मेदिनीपुर और पश्चिम मेदिनीपुर जिले की 18 सीटों पर टीएमसी पिछड़ गई थी। ऐसे में टीएमसी ने इन 18 सीटों पर 10 उम्मीदवारों को बदल डाला।