केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को असम के चिरांग में एक चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। शाह ने कहा कि कांग्रेस कभी भी हिंसा, आतंकवाद और आंदोलन समाप्त करना नहीं चाहती थी। हमने डबल इंजन सरकार के माध्यम से असम को विकास के रास्ते पर ले जाने का काम किया।
भाषण के दौरान शाह ने बदरुद्दीन अजमल पर भी वार किया। गृह मंत्री शाह ने कहा कि कल (मंगलवार) तो बदरुद्दीन अजमल ने कहा था कि सरकार की चाबी मेरे पास है, मैं जैसे चाहूंगा वैसे सरकार चलाऊंगा, जिसको चाहूंगा उसको मंत्री बनाऊंगा। अरे बदरुद्दीन, सरकार की चाबी आपके हाथ में नहीं है, असम की जनता के हाथ में चाबी है। कान खोलकर सुन लो बदरुद्दीन, असम को घुसपैठियों का अड्डा हम नहीं बनने देंगे। आपको उखाड़ कर फेंकने का काम भाजपा करेगी।
पढ़ें शाह के संबोधन की बड़ी बातें...
- गृह मंत्री ने राहुल गांधी को असम का पर्यटक बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी कहते हैं कि बदरुद्दीन अजमल असम की पहचान है। आप मुझे बताएं कि क्या अजमल असम की पहचान है या भूपेन हजारिका, उपेंद्र नाथ और शंकर देव। ब्लैक माउंटेन बदरुद्दीन अजमल असम की पहचान नहीं हो सकता है।
- मोदी जी ने असम के विकास के लिए ढेर सारे काम किए हैं। ब्रह्मपुत्र नदी पर 6 ब्रिज बनाए, तेल क्षेत्र के विकास के लिए 46 हजार करोड़ रुपये दिए हैं।
- पांच वर्ष पहले मैं इसी क्षेत्र में आया था तब मैंने कहा था कि भाजपा और असम गण परिषद की सरकार बनाकर दीजिए, हम आतंकवाद मुक्त असम बनाकर देंगे। हमने कहा था कि हम असम में हिंसा का युग समाप्त करके शांति स्थापित करेंगे।
- हमने बोडोलैंड समझौता किया है और समझौते के तहत दो तिहाई वादे छह महीने में पूरे कर दिए हैं। शाह ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) असम को फिर से घुसपैठियों का अड्डा नहीं बनने देगी।
- उन्होंने एआईयूडीएफ प्रमुख बदरुद्दीन अजमल से कड़े शब्दों में कहा कि भाजपा पिछले पांच वर्षों के दौरान उनके द्वारा अतिक्रमण की गई जमीन को सफलतापूर्वक मुक्त कराने के बाद असम को फिर से घुसपैठियों का अड्डा नहीं बनने देगी।
- शाह ने कहा कि जनता तय करेगी कि असम में सरकार कौन चलाएगा। शाह ने चिरांग जिले के बिजनी में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कान खोल कर सुन लो अजमल, असम को घुसपैठियों का अड्डा फिर से नहीं बनने देंगे।
- उन्होंने कहा कि अजमल दावा करते हैं कि अगली सरकार बनाने की 'ताला और चाबी' उनके हाथों में है और वह तय करेंगे कि असम में अगली सरकार कौन बनाएगा, लेकिन उन्हें इस बात का पता नहीं है कि 'ताला और चाबी' असम की जनता के हाथ में है।