आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि केंद्र में मजबूत सरकार के होते हुए भी मणिपुर में लंबे समय तक दंगे की आग क्यों भड़कती रही। जो समाज वर्षों से एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहते आए थे, वे अचानक एक दूसरे के विरुद्ध क्यों हो गए?
उन्होंने कहा कि यह समझने की कोशिश की जानी चाहिए कि क्या इस आग को भड़काने में विदेशी शक्तियों का हाथ था, जो इस भौगोलिक क्षेत्र में उन्हें लाभ पहुंचा सकती थीं। भागवत ने विजयादशमी पर आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम के बाद यह बात कही।
मणिपुर की राज्य सरकार को भागवत ने पूरा नंबर दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से काम करती रही। कभी कोई विवाद नहीं हुआ। अचानक इस समय उन दो समुदायों में वैमनस्य पैदा कर दिया गया जो एक दूसरे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से रहने की पक्षधर हैं। बड़ा प्रश्न है कि इस हिंसा को शांत करने में केंद्र-राज्य सरकारें भी लंबे समय तक असफल रहीं।
वामपंथ पर किया हमला
भाजपा नेता नितिन गडकरी सहित कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति में मोहन भागवत ने कहा कि इस समाज में कुछ लोग हैं जो स्वयं को बहुत जाग्रत लोग कहते हैं। लेकिन उनका दुनिया की किसी भी व्यवस्था, धर्म, संस्कृति में विश्वास नहीं है। हर स्थान पर वे आधुनिकता के नाम पर परंपरागत मान्य व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने का प्रयास करते रहते हैं।
देश के लिए गौरवपूर्ण क्षण
मोहन भागवत ने कहा कि देश ने जी-20 का सफल आयोजन किया। इससे भारतीय परंपरा-संस्कृति और आतिथ्य का पूरी दुनिया में प्रचार हुआ। इससे देश का मान बढ़ा है। उन्होंने खेलों में भारत के शानदार प्रदर्शन के लिए सबको बधाई दी और कहा कि यह क्रम अब रुकना नहीं चाहिए। देश को हर दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास करना चाहिए।
राम मंदिर को भी किया याद
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि 22 जनवरी को राम मंदिर का उद्घाटन होना है। इस दिन पूरे देश के हर मंदिर में पूजा-पाठ का कार्यक्रम होना चाहिए। इससे पूरे देश के निवासी राम मंदिर से अपना जुड़ाव महसूस कर सकेंगे और इसके माध्यम से मंदिर के उद्घाटन में अप्रत्यक्ष तरीके से शामिल हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर का उद्घाटन भारतीय इतिहास में बड़ी घटना है जिसे हमेशा याद रखा जाएगा।