फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

IEA: भारत में बिजली की मांग 2050 में अफ्रीका की कुल खपत से ज्यादा होगी; अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का दावा

Tue, 24 Oct 2023 03:49 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईईए ने दावा किया कि भारत में आने वाले तीन दशकों में किसी भी देश की तुलना में सबसे बड़ी ऊर्जा मांग में वृद्धि देखी जाएगी। साथ ही रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत अपने ऊर्जा विकास में एक गतिशील नए चरण में आगे बढ़ रहा है।
विज्ञापन
Electricity (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने नवीनतम विश्व ऊर्जा आउटलुक में भारत को लेकर एक चौंकाने वाली बात कही है। आईईए ने मंगलवार को कहा, घरों में एयर कंडीशनर चलाने के लिए भारत की बिजली की मांग 2050 तक नौ गुना बढ़ने का अनुमान है। यहां तक कि पूरे अफ्रीका में कुल बिजली खपत से ज्यादा हो जाएगी। 
विज्ञापन


विश्व ऊर्जा आउटलुक में दावा
आईईए के मुताबिक, भारत में आने वाले तीन दशकों में विश्व के किसी भी देश की तुलना में सबसे बड़ी ऊर्जा मांग में वृद्धि देखी जाएगी। बता दें इसने अनुमानित नीतिगत परिदृश्यों के तहत भारत की ऊर्जा आपूर्ति 2022 में 42 एक्साजूल (ईजे) से बढ़कर 2030 में 53.7 ईजे और 2050 में 73 ईजे और वहीं घोषित प्रतिज्ञाओं के अनुसार 2030 तक 47.6 ईजे और 2050 तक 60.3 ईजे हो जाने का अनुमान लगाया है।

तेल की मांग में भी होगी बढ़ोतरी
घोषित नीतिगत परिदृश्य के तहत तेल की मांग 2022 में 5.2 मिलियन बैरल प्रति दिन (बीपीडी) से बढ़कर 2030 में 6.8 मिलियन बीपीडी और 2050 में 7.8 मिलियन बीपीडी हो जाती है। घोषित प्रतिज्ञाओं के तहत, यह मांग 2030 में 6.2 मिलियन बीपीडी और 2050 में 4.7 मिलियन बीपीडी की मांग कर रही है।
विज्ञापन


पेरिस स्थित एजेंसी ने मुताबिक, बिजली की खपत पर शीतलन आवश्यकताओं का प्रभाव पहले से ही स्पष्ट है। बिजली की मांग तापमान के प्रति संवेदनशील है और भारत के मामले में मांग में तेज वृद्धि हुई है क्योंकि तापमान 25 डिग्री सेल्सियस की सीमा को पार कर जाता है। स्पेस कूलिंग के कारण बिजली की खपत 2019 और 2022 के बीच 21 प्रतिशत बढ़ गई और आज लगभग 10 प्रतिशत बिजली की मांग स्पेस कूलिंग आवश्यकताओं से आती है।

आईईए के मुताबिक भारत ऊर्जा विकास में आगे बढ़ रहा
आईईए ने मुताबिक, ऊर्जा दक्षता नीतियों के माध्यम से शीतलन मांग को कम करने से बैटरी या महंगी स्टैंडबाय उत्पादन क्षमता में निवेश की आवश्यकता कम हो जाती है। इस प्रकार नवीकरणीय ऊर्जा को अधिक लागत प्रभावी ढंग से एकीकृत करने में मदद मिलती है। आईईए ने कहा, भारत अपने ऊर्जा विकास में एक गतिशील नए चरण में आगे बढ़ रहा है, जो दीर्घकालिक शुद्ध शून्य उत्सर्जन महत्वाकांक्षा, नियामक परिष्कार में वृद्धि, स्वच्छ ऊर्जा तैनाती पर ध्यान केंद्रित करने और घरेलू स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं के निर्माण द्वारा चिह्नित है।

बता दें ऊर्जा क्षेत्र को बदलने और CO2 उत्सर्जन को कम करते हुए जीवाश्म ईंधन के आयात बोझ को कम करने की क्षमता को पहचानते हुए भारत ने 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन लक्ष्य की घोषणा की है । स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति और स्वच्छ प्रौद्योगिकी विनिर्माण को बढ़ाने के लिए नीतियां बनाई हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें