पूरा उत्तर भारत इस वक्त भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया की सबसे गर्म 15 जगहों में से 10 भारतीय शहरों का नाम शुमार है। ये दस शहर हैं- जैसलमेर, श्रीगंगानगर, चूरू, ग्वालियर, लखनऊ, बांदा, भोपाल, अकोला, बाड़मेर और बीकानेर।
एल डोराडो वेदर वेबसाइट के अनुसार राजस्थान के चुरू और श्रीगंगानगर सबसे गर्म स्थान हैं। यहां तापमान 48.9 डिग्री सेल्सियस और 48.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इसके बाद पाकिस्तान के जैकोबाबाद का स्थान आता है, जहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
रविवार को भारत की दो तिहाई जनसंख्या लू की चपेट में थी। कई शहर जैसे दिल्ली, जयपुर, कोटा, हैदराबाद और लखनऊ में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब था। वहीं पहाड़ी शहर नैनीताल, शिमला और श्रीनगर, जिन्हें आमतौर पर ठंडा माना जाता है, यहां भी तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।
शिमला में रविवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस था और नैनीताल में 33 डिग्री सेल्सियस। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के डाटा पर आधारिक अध्ययन के अनुसार बीते दो दशकों से पहाड़ी क्षेत्रों पर गर्म दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है। एक जून को उत्तराखंड और मसूरी में भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था।
आईएमडी के जनरल निदेश, मृत्युंजय मोहपात्रा का कहना है कि आने वाले दो दिनों में स्थिति सुधर सकती है। क्योंकि जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश और तूफान आने की संभावना है। उन्होंने कहा रि अभी लू की स्थिति पाकिस्तान और राजस्थान में रेगिस्तानों से निकलने वाली शुष्क हवाओं के कारण है। हम उम्मीद करते हैं कि बंगाल की खाड़ी और उत्तर-पश्चिम से आने वाली हवाओं से गर्मी थोड़ी कम होगी।
मोहपात्रा ने कहा कि अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में वृद्धि हो रही है। जिससे सतह अधिक गर्म हो रही है और गर्म हवाओं के अधिक समय तक चलने का संकेत है। हम ये देख रहे हैं कि बीते दो दशक में देश में लू की समय बढ़ रही है।
संसद में इस साल फरवरी में दी गई जानकारी के अनुसार, खतरनाक गर्मी के कारण भारत में 2010 से 2018 के बीच 6,167 लोगों की मौत हो गई। अकेले 2015 में ही 2081 मौत रिकॉर्ड की गई।
मौसम विभाग तापमान को विभिन्न जगहों के अनुसार अलग-अलग परिभाषित करता है। मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान को लू की स्थिति माना जाता है। वहीं अगर तटीय इलाकों की बात करें तो यहां 37 डिग्री सेल्सियस को और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर इन्हें गर्म लहर वाला स्थान माना जाता है।
लंबे समय से सूखे का सामना कर रहे महाराष्ट्र के विदर्भ और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है। यहां लोगों को कृषि संकट का सामना भी करना पड़ रहा है। शुक्रवार को मौसम विभाग ने कहा कि बीते साल के मुकाबले कई क्षेत्रों को 79 फीसदी तक बारिश की कमी का सामना करना पड़ा है।
विदर्भ और बुंदेलखंड में कई बांधों में पानी का स्तर क्षमता से 10 फीसदी तक कम हो गया है। सेंट्रल वॉटर कमीशन का कहना है कि पानी का स्तर बीते 10 साल में सबसे अधिक कम हो गया है।