मुंबई में जहां तेज तूफ़ान ने जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है, वहीं दिल्ली वालों को इस दौरान कड़ी गर्मी से राहत मिलती रहेगी। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक इस पूरे हफ्ते अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है।
कुछ वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि गर्मी में तापमान बढ़ने के साथ-साथ कोरोना वायरस सुस्त पड़ सकता है और इसके कारण कोरोना के संक्रमण दर में गिरावट आ सकती है।
लेकिन अब तक का अनुभव बताता है कि कोरोना वायरस पर गर्मी का कोई असर नहीं पड़ा है। भारत सहित सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, ब्राज़ील और अन्य देशों में गर्मी में उच्च तापमान के बाद भी कोरोना की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई।
इन क्षेत्रों में इस दौरान कोरोना के मामले लगातार बढ़ते रहे हैं।
अब कुछ लोगों का अनुमान है कि भारत जैसे देश में मानसून के आने के साथ ही संक्रमण बढ़ने की संभावना बन सकती है। लेकिन निम्स के शीर्ष वैज्ञानिक जी देवपुरा का कहना है कि इस बात के कोई प्रमाण नहीं हैं कि वर्षा ऋतु शुरू होने और तापमान में गिरावट आने के कारण कोरोना के संक्रमण में किसी तरह की गिरावट दर्ज की जा सकती है।
अभी तक का अनुभाव यही है कि कम तापमान में कोरोना वायरस तेजी के साथ फैलता रहा है। लेकिन बारिश से इसका कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हुआ है।
इसलिए इस समय वर्षा ऋतु और कोरोना के संबंध में कोई बात तथ्यात्मक तौर पर नहीं कही जा सकती।
वहीं, पुणे महाराष्ट्र में सामुदायिक स्वास्थ्य से जुड़े डॉक्टर अभय शुक्ला का मानना है कि वर्षा ऋतु में कोरोना वायरस के संक्रमण की दर में कमी हो सकती है, लेकिन ऐसा वर्षा का कोरोना पर सीधा असर होने के कारण नहीं, बल्कि इस दौरान लोगों की आवाजाही सीमित होने के कारण हो सकता है।
इस दौरान बाहर कम निकलते हैं, इस वजह से आउट डोर ट्रांसमिशन कम हो सकता है, लेकिन इस दौरान लोग अपने सीमित माहौल में ही बने रहते हैं, इस कारण इन डोर ट्रांसमिशन में बढ़ोतरी हो सकती है।