मुंबई महानगर में गुरुवार से चल रही जल टैंकर संचालकों की हड़ताल से हाहाकार मचा हुआ है। इसे लेकर मुंबई नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया। नगर निगम ने मुंबई में आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू कर दिया है। अब नगर निगम घर-घर पानी पहुंचाएगा।
बृहन्मुंबई नगर निगम ने कहा कि वह निजी जल टैंकरों, कुओं और बोरवेलों का अधिग्रहण करने के लिए अधिनियम की धारा 34 (ए) और 65 (1) के तहत शक्तियों का प्रयोग कर रहा है। टैंकर परिचालन का प्रबंधन बीएमसी वार्डों, मुंबई पुलिस और परिवहन आयुक्तालय की टीमें करेंगीं। इसके अलावा निजी आवासीय सोसाइटियों और अन्य हितधारकों को जलापूर्ति के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की गई है।
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सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बीएमसी से हड़ताल तत्काल समाधान निकालने के लिए कहा। वहीं मुंबई जल टैंकर एसोसिएशन ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। फडणवीस ने एक्स पर लिखा कि उन्होंने मुंबई नगर निगम आयुक्त को संशोधित नियमों और टैंकर मालिकों की मांगों को लेकर तत्काल समाधान खोजने का निर्देश दिया है। कुछ स्थानों पर पानी की समस्या उत्पन्न हो गई है।
वहीं केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) और केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) के अधिकारियों के साथ बैठक की। पाटिल ने सीजीडब्ल्यूए प्रशासन को एनओसी प्राप्त करने के लिए भू-नीर ऑनलाइन प्रणाली को और अधिक उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने के लिए सरल बनाने का निर्देश दिया।
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क्यों हो रही हड़ताल
टैंकरों को जलापूर्ति करने वाले निजी कुओं के मालिकों को नगर निगम द्वारा जारी नोटिस के विरोध में गुरुवार को मुंबई जल टैंकर एसोसिएशन (एमडब्ल्यूटीए) ने अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल कर दी थी। प्रवक्ता अंकुर शर्मा ने बताया कि एसोसिएशन के पास करीब 1,800 पंजीकृत टैंकर हैं। वे शहर के विभिन्न हिस्सों में करीब 350 एमएलडी पानी की आपूर्ति करते हैं। सभी टैंकरों को अनिश्चिकाल के लिए रोक दिया गया।
उन्होंने कहा कि प्राधिकारियों ने 200 वर्ग मीटर भूमि, कुएं के पट्टे या स्वामित्व का प्रमाण, डिजिटल जल प्रवाह मीटर की स्थापना, बीआईएस मानक का पालन, दैनिक जलग्रहण का सटीक माप और कुछ अन्य चीजों को अनिवार्य कर दिया है। इसके अलावा केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) भी लेना अनिवार्य कर दिया है। जल टैंकरों की हड़ताल हो जाने से मुंबई में हाहाकार मच गया। लोगों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा। इसके बाद बृहन्मुंबई नगर निगम ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 लागू करने का एलान किया।